बंधक संकट : उड़ीसा सरकार 8 मांगों पर हुई सहमत

Naxalites
भुवनेश्वर। उड़ीसा में पांच दिन पहले नक्सलियों द्वारा अगवा किए गए मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन मांझी सुरक्षित हैं और उन्हें जल्द रिहा किए जाने की उम्मीद है। सरकार ने नक्सलियों की ओर से रखी गई 14 में से आठ मांगें मान ली हैं।

राज्य के गृह सचिव यू. एन. बेहरा ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों अधिकारी सुरक्षित हैं और जल्द ही उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। सरकार और नक्सलियों द्वारा सुझाए गए तीन मध्यस्थों के बीच रविवार को शुरू हुई वार्ता सोमवार को भी जारी रही और अब यह मंगलवार को भी जारी रहेगी।

बेहरा और पंचायती राज सचिव एस. एन. त्रिपाठी ने राज्य के अतिथि गृह में नक्सलियों के मध्यस्थ जी. हरगोपाल, आर. सोमेश्वर राव और दंडपाणि मोहंती के साथ दूसरे दौर की बातचीत के बाद संवाददाताओं को बताया, "हम अभी तक आठ मुद्दों पर सहमत हुए हैं। हमें विश्वास है कि जिलाधिकारी और इंजीनियर को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।"

उन्होंने बताया कि मंगलवार को भी बातचीत जारी रहेगी। बातचीत का पहला दौर रविवार को शुरू हुआ था।

कृष्णा की रिहाई को लेकर नक्सलियों ने सरकार को मांगों की एक सूची सौंपी है, जिसमें नक्सल-विरोधी अभियान रोकने, एक शीर्ष नेता की रिहाई, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ हुए समझौतों को रद्द करने और पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सल समर्थकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग शामिल है।

मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी कृष्णा और एक जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन मांझी को नक्सलियों ने 16 फरवरी को अगवा कर लिया था। उधर नक्सल प्रभावित कोरापुट, रायगदा, मलकानगिरी, गजपति और कंधमाल जिलों में नक्सलियों के 24 घंटे बंद के आह्वान की वजह से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। नक्सलियों ने अपनी मांगों के मानने में देरी के कारण इस बंद का आह्वान किया।

नक्सलियों के मध्यस्थ दंडपाणि मोहंती ने उम्मीद जताई कि सरकार विभिन्न जेलों में बंद 629 निर्दोष लोगों की रिहाई के लिए जल्द ही कारगर कदम उठाएगी, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और जिन पर झूठे मामले दर्ज हैं।

इससे पहले जी. हरगोपाल ने हालांकि कहा कि नक्सलियों के साथ बातचीत लंबी खिंच सकती है, क्योंकि उनके नेता गांति प्रसादम को अब तक जेल से रिहा नहीं किया गया है। एक स्थानीय टेलीविजन चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, "गांति प्रसादम यदि उन्हें मंत्रणा के लिए उपलब्ध हो जाते हैं तो बातचीत की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।" सूत्रों के अनुसार राज्य पुलिस ने अदालत से प्रसादम का जेल स्थनानांतरण वारंट हासिल कर लिया है और उसे शनिवार रात ही आंध्र प्रदेश की जेल से ले आई है।

प्रसादम के वकील ने सोमवार को कटक उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की। इसके साथ ही चार अन्य नक्सलियों ने भी जमानत याचिका दाखिल की है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अदालत इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई कर सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस इस याचिका का विरोध नहीं करेगी जिससे प्रसादम की रिहाई का रास्ता साफ हो जाएगा।

एक विशेषज्ञ ने हालांकि कहा कि सुनवाई के दौरान हालांकि यह न्यायाधीश पर निर्भर करता है कि वह जमानत देने का फैसला देते हैं अथवा नहीं। मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी कृष्णा और एक जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन मांझी को नक्सलियों ने 16 फरवरी को अगवा कर लिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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