अरब के कई देशों में सत्ता परिवर्तन के लिए अंगराई

काहिरा/त्रिपोली/मनामा/। मिस्र और ट्यूनीशिया में वर्षो से सत्ता पर काबिज शासकों के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन अब अरब जगत के कई देशों में फैल गया है। ईरान, लीबिया, बहरीन, जोर्डन, अल्जीरिया, कुवैत, मोरक्को में लोकतंत्र और राजनीतिक सुधार की मांग के साथ प्रदर्शन जारी है।

इन देशों में सोमवार को भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहे। कहीं जोरदार ढंग से प्रदर्शन को अंजाम दिया गया तो कहीं प्रदर्शन चिंगारी सुलगती रही। कई जगहों पर सुरक्षाकर्मियों को प्रदर्शनकारियों से निपटने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।
लीबिया में मुअम्मार गद्दाफी के खिलाफ पिछले 15 फरवरी से शुरू हुए प्रदर्शन में अब तक 233 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लीबिया में इंटरनेट सेवाओं पर अचानक ही रोक लगा दी गई है।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स वाच ने मृतकों का यह आंकड़ा देते हुए सरकार से प्रदर्शनकारियों पर हमले रोकने की अपील की है।
गद्दाफी के बेटे ने दी गृह युद्ध की चेतावनी :लीबिया के नेता मुअम्मार गद्दाफी के बेटे ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सुधार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तो देश को एक रक्तरंजित गृह युद्ध का सामना करना होगा।

समाचार एजेंसी एकेआई के अनुसार गद्दाफी के शासन के खिलाफ बढ़ रहे विरोध के बीच सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी ने टेलीविजन पर एक सम्बोधन में कहा कि उनके पिता सेना के समर्थन से सत्ता में बने हुए हैं और "अंतिम पुरुष, अंतिम महिला और अंतिम गोली के रहने तक लड़ेंगे।"
खबर है कि सोमवार को विरोध प्रदर्शन की लपट क्षेत्रीय कस्बों एवं शहरों से होते हुए राजधानी त्रिपोली तक पहुंच गई और जिस समय सैफ गद्दाफी का लम्बा भाषण प्रसारित हो रहा था, उस समय गोलियों की आवाज गूंज रही थी।

अमेरिका स्थित संगठन, ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के अनुसार, गद्दाफी की तानाशाही के खिलाफ 15 फरवरी से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 233 लोग मारे जा चुके हैं।ज्ञात हो कि ट्यूनीशिया व मिस्र में हुई सफल क्रांतियों से उत्साहित हजारों लीबियाई नागरिक गद्दाफी से गद्दी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। गद्दाफी पिछले 41 वर्षो से सत्ता पर काबिज हैं। सरकार विरोधी प्रदर्शन बहरीन, यमन, अल्जीरिया एवं जोर्डन में भी हो रहे हैं।

एचआरडब्ल्यू ने अन्य देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि उन्हें लीबिया से कहना चाहिए कि वह प्रदर्शनकारियों की अवैध हत्याएं बंद करे।
सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी ने कहा कि मरने वालों की संख्या 233 से कम है और इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता के 41 वर्षो के शासन के खिलाफ विद्रोह की निंदा की और इसे एक विदेशी साजिश बताया। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई भूल थी और उन्होंने एक नए लीबिया के निर्माण का नागरिकों से आग्रह किया।

अरबी टीवी चैनल अल-अरबिया ने बेटे गद्दाफी के हवाले से कहा, "लीबिया एक चौराहे पर खड़ा है। यदि हम आज सुधारों पर राजी नहीं होते, तो हमें केवल 84 लोगों पर ही शोक नहीं पकट करना होगा, बल्कि हजारों लोगों की मौतों पर आंसू बहाना होगा, और लीबिया में खून की नदियां बहेंगी।"

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सैकड़ों की संख्या में लीबियाई नागरिकों ने रविवार देर रात त्रिपोली में एक दक्षिण कोरियाई निर्माण स्थल पर हमला बोल दिया। हमला बोलने वालों में कुछ के पास चाकू और बंदूकें थीं। इसके परिणामस्वरूप वहां टकराव शुरू हो गया और कम से कम चार विदेशी नागरिक घायल हो गए।

अधिकारी ने कहा कि तीन दक्षिण कोरियाई श्रमिक घायल हुए हैं, उनमें से एक को चाकू घोंपा गया है। इसके अलावा एक या दो बांग्लादेशी श्रमिक घायल हुए हैं।

लीबिया में सोमवार को भी सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं और सरकारी ईमारतों को आग के हवाले कर दिया गया है।

इसके पहले की खबरों में कहा गया था कि गद्दाफी लीबिया छोड़ कर भाग गए हैं, जिसके कारण भीड़ त्रिपोली की सड़कों पर उतर कर जश्न मना रही है। लेकिन बेटे गद्दाफी ने टीवी पर कहा कि उनके पिता लीबिया में ही हैं और जंग का नेतृत्व कर रहे हैं।

सैफ अल-इस्लाम ने कहा, "ट्यूनिशिया व मिस्र जैसा नहीं है लीबिया।" उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शन देश को बांट सकता है और संकट की स्थिति पैदा कर सकता है।

इसके पहले कई दिनों से त्रिपोली में गद्दाफी समर्थक रैलियों का वर्चस्व था। अभी तक सरकार विरोधी प्रदर्शन का केंद्र देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर बेनगाजी ही बना हुआ था।

सरकारी समाचार एजेंसी जेएएनए के अनुसार पिछले कुछ दिनों के दौरान लीबिया में दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों पर एक विदेशी नेटवर्क से सम्बंधित होने और देश को अस्थिर करने और लोगों की राष्ट्रीय एकता को तोड़ने का आरोप है।

गिरफ्तार लोगों में ट्यूनीशिया, मिस्र, सूडान, तुर्की, फिलीस्तीन और सीरिया के नागरिक शामिल हैं।

दूसरी ओर एक अमेरिकी अधिकारी ने सोमवार तड़के कहा कि अमेरिका लीबिया में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के जवाब में सभी उचित कार्रवाइयों पर विचार कर रहा है।

खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को नियमित रूप से लीबिया में तेजी के साथ बदलते घटनाक्रम की जानकारी दी जा रही है। अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन वरिष्ठ लीबियाई अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगेगा, क्योंकि अमेरिका चाहता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई बंद हो।

यूरोपीय संघ ने हिंसा रोकने की अपील :

ब्रसेल्स : यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एश्टन ने लीबिया के अधिकारियों से हिंसा रोकने और संयम बरतने का आग्रह किया है। लीबिया में सरकार के खिलाफ जारी हिंसा में 200 लोग मारे जा चुके हैं।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक एश्टन ने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक से ठीक पहले कहा, "हम संयम बनाए रखने का आग्रह करते हैं।" उन्होंने कहा, "यह बहुत जरूरी है कि हिंसा को तत्काल रोकी जाय।"

दुनिया के बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक लीबिया में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 15 फरवरी को शुरू हुआ था। कुछ प्रमुख शहरों बेंघाजी, बयादा और तोबर्क में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है।

भारत में लीबिया के राजदूत का त्यागपत्र :

भारत में लीबिया के राजदूत अली अल-एसावी ने अपनी सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों का दमन किए जाने के विरोध में पद से त्यागपत्र दे दिया है। बीबीसी के मुताबिक उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति मुअम्मार गद्दाफी से पद छोड़ने की भी मांग की है।

बीबीसी ने अपनी अरब सेवा वेबसाइट पर खबर दी है कि राजदूत ने सरकार पर विदेश सेवा के अधिकारियों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को दबाने में करने का आरोप लगाया।

उधर अलजजीरा चैनल ने बताया कि चीन में लीबिया के वरिष्ठ राजदूत ने भी सोमवार को इस मामले में पद से त्यागपत्र दे दिया है और लीबिया की सेना से राजनीतिक अस्थिरता में हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है।

राजदूत ने दावा किया है कि गद्दाफी के पुत्रों में हिंसक युद्ध छिड़ गया है और सम्भवत: गद्दाफी ने देश छोड़ दिया है। इस बात की अल जजीरा ने हालांकि पुष्टि नहीं की है।

एक चिकित्सक ने अल जजीरा टेलीविजन से कहा कि शुक्रवार को प्रदर्शन में फैली हिंसा के कारण 200 से अधिक लोग मारे गए हैं।

अमेरिका ने चिंता जताई :

वाशिंगटन : अमेरिका ने उन रिपोर्टों को लेकर रविवार को चिंता जाहिर की, जिनमें लीबिया में सैकड़ों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की बात शामिल है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पी.जे.क्राउले ने एक बयान में कहा, "अमेरिका लीबिया से आ रहीं परेशान करने वाली खबरों एवं चित्रों को लेकर गम्भीर रूप से चिंतित है।"

क्राउले ने कहा कि अमेरिका अभी तथ्यों को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई विश्वसनीय खबरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें हाल की हिंसा में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की बात कही गई है।

अमेरिकी अधिकारियों ने लीबियाई विदेश मंत्री मूसा कुसा सहित वहां के कई अधिकारियों से बात की है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की जा रही हिंसक कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है।

बहरीन की राजधानी में जमे हैं प्रदर्शनकारी :

मनामा : बहरीन में सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी राजधानी मनामा में पिछले नौ दिनों से पर्ल चौराहे पर लगातार डेरा जमाए हुए हैं। एक प्र्दशनकारी ने सोमवार को कहा, "बहरीन का कोई भी नागरिक बहरीन की मौजूदा सरकार को नहीं चाहता।"

बहरीन में 14 फरवरी से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में अब तक कम से कम छह व्यक्ति मारे गए हैं और कई सारे घायल हुए हैं।

कतर के टीवी चैनल अल जजीरा ने कहा है कि पर्ल स्क्वे यर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं। पर्ल स्क्वे यर पिछले नौ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है।

ज्ञात हो कि बहरीन का विद्रोह ट्यूनीशिया एवं मिस्र में हुई सफल क्रांतियों से प्रेरित है। ट्यूनिशिया में एक महीने तक अशांति का दौर चला था और उसके बाद राष्ट्रपति जिने अल-अबीदीन बेन अली के शासन का 14 जनवरी को अंत हो गया था। उसके कुछ दिनों बाद 25 जनवरी को मिस्र में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को इस्तीफा दे दिया।

ट्यूनीशिया और मिस्र के जनांदोलनों का परिणाम यह है कि अल्जीरिया, जोर्डन, सीरिया और ईरान में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

बहरीन, खाड़ी क्षेत्र का सबसे छोटा देश है, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है।

बीबीसी ने कहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि पहले उनकी मांगें पूरी की जाएं, उसके बाद वे तानाशाही के साथ बातचीत करेंगे। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार इस्तीफा दे दे, राजनीतिक कैदियों को रिहा कर दिया जाए और प्रदर्शनकारियों की मौतों की जांच कराई जाए।

शाहजादे शेख सलमान बिन हमद अल-खलीफा ने रविवार को सीएनएन से कहा था कि प्रदर्शनकारियों को पर्ल स्क्वे यर इलाके में बने रहने की पूरी छूट होगी। उन्होंने प्रस्तावित बातचीत के बारे में कहा, "देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को बातचीत की मेज पर बोलने का हक है।"

यमन में अब तक 12 मरे :

सना : यमन में 32 वर्षो से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से इस्तीफे की मांग को लेकर लोकतंत्र समर्थकों का पिछले 11 दिनों से प्रदर्शन जारी है। पिछले गुरुवार से जारी हिंसक प्रदर्शन में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

राजधानी सना में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबर है। उधर अदन शहर में लोकतंत्र समर्थकों पर सुरक्षाबलों द्वारा की गई गोलीबारी में सोमवार को एक किशोर की मौत हो गई जबकि चार लोग घायल हो गए।

समाचार चैनल अलजजीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि खोर्माकसार जिले में पुलिस ने उस वक्त गोलीबारी आरम्भ कर दी जब वहां गश्त कर रहे सैनिकों पर प्रदर्शनकारी युवा पत्थर फेंक रहे थे।

ज्ञात हो कि यमन के नेतृत्व में परिवर्तन की मांग को लेकर लोग राजधानी सना सहित अदन और तेईज शहरों में कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार एवं बेरोजगारी से नाराज तथा मिस्र एवं ट्यूनीशिया में हुई क्रांति से प्रेरित यमनवासी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सालेह पिछले 32 वर्षो से सत्ता पर काबिज हैं।

पिछले सप्ताह सालेह ने कहा था कि वह 2013 में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में प्रत्याशी नहीं होंगे।

लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध लगातार 11वें दिन जारी रखा। राजधानी सना में भी प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबर है।

सना विश्वविद्यालय के बाहर 3000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन करने से रोकने की कोशिश की गई। यह कोशिश 50 सरकार समर्थकों ने की। शनिवार को विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों और साले समर्थकों के बीच गोलीबारी हुई थी।

प्रदर्शनकारी छात्र व युवा इस दौरान यह नारेबाजी करते सुने गए, "भविष्य की पीढ़ी के लिए गद्दी छोड़ो अली।"

इस दौरान एक सालेह समर्थक ने अपनी रायफल से भीड़ पर गोली चला दी लेकिन इससे कोई हताहत नहीं हुआ।

इब शहर में लगभग 1000 प्रदर्शनकारी फ्रीडम चौक पर जमे हुए हैं और अब तो उन्होंने शिविर बना लिए हैं।

इस बीच सालेह ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनावों में हार के बाद ही वह इस्तीफा देंगे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह 2013 के राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।

उन्होंने कहा, "यदि वे चाहते हैं कि मैं इस्तीफा दे दूं तो उन्हें बता देना चाहता हूं चुनाव में हारने के बाद ही मैं इस्तीफा दूंगा।"

सालेह ने रविवार को विपक्ष के साथ खुला संवाद करने की पेशकश की थी। व्यापारियों और स्थानीय राजनीतिज्ञों के समक्ष दिए गए अपने एक भाषण में सालेह ने घोषणा की थी कि वह सभी 'वैध मांगों' को मानने के लिए तैयार हैं।

मोरक्को में प्रदर्शन में 5 मरे

रबात : मिस्र एवं ट्यूनीशिया में हुई सफल क्रांतियों के बाद अब मोरक्को में राजनीतिक सुधार की मांग जोर पकड़ रही है। मोरक्को के लोगों ने सोमवार को भी अपना प्रदर्शन जारी रखा। इस बीच रविवार को आयोजित किए गए व्यापक प्रदर्शन के दौरान आगजनी की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई।

सरकारी समाचार एजेंसी मैप ने आंतरिक मंत्री तैब चेरकाओई के हवाले से कहा कि आंदोलन के दौरान 115 सुरक्षाबलों सहित 128 लोग घायल हो गए।

मोरक्को की जनता राजनीतिक सुधार के साथ ही छठे शाह मोहम्मद के अधिकारों को सीमित करने की मांग कर रही है। मोरक्को में शाह ही प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। यहां अन्य देशों की तरह शाह के खिलाफ उतना विरोध नहीं जितना सरकार, संसद और भ्रष्टाचार के खिलाफ है। यहां अधिकतर राजनीतिक दलों ने इस तरह के प्रदर्शन का विरोध किया है।

ट्यूनीशिया में जिने अल-अबीदीन बेन अली को जनवरी में कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, जबकि मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को इस्तीफा दे दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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