नक्सली नेताओं को रिहा कर सकती है उड़ीसा सरकार (लीड-2)
सूत्रों ने बताया कि सरकार कई जेलों में बंद नक्सली नेताओं के ऊपर लगे आरोपों की समीक्षा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
नक्सलियों के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार अपने वकीलों को यह कह सकती है कि वे नक्सलियों की रिहाई के लिए उनके वकीलों द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति न उठाएं।
ज्ञात हो कि उड़ीसा के मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और उनके साथ मौजूद एक जूनियर इंजीनियर को नक्सलियों ने बुधवार शाम को अगवा कर लिया था।
दोनों अधिकारियों को अगवा करने के बाद नक्सलियों ने उनकी रिहाई पर मध्यस्थता करने के लिए सरकार को दो नाम सुझाए। इसके बाद सरकार ने शुक्रवार को मानवाधिकार कार्यकताओं और शिक्षाविदों जी. हरगोपाल और आर. सोमेश्वर राव को मध्यस्थता करने का अनुरोध किया।
सूत्रों ने बताया कि सरकार द्वारा नक्सली विचारक गांती प्रसादम को रिहा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार यह कदम मध्यस्थता करने वालों के सुझाव पर उठा रही है। मध्यस्थकारों का कहना है कि प्रसादम की रिहाई से बातचीत की प्रक्रिया जोर पकड़ेगी। अधिकारियों ने हालांकि इस मसले पर टिप्पणी करने से इंकार किया है।
दिल्ली से एक स्थानीय टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में हरगोपाल ने कहा, "मैं प्रसादम की रिहाई के लिए उड़ीसा सरकार से अनुरोध करता हूं।"
उन्होंने कहा, "उसके बाहर आने पर शायद मैं और आर.एस. राव मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास करेंगे। प्रसादम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)
की ओर से नक्सलियों से बात कर सकता है। हम सम्भवत: कोई हल निकाल सकते हैं।"
सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश की जेल में बंद प्रसादम को राज्य पुलिस शनिवार रात ही यहां ला चुकी है।
राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए आईएएनएस को बताया, "प्रसादम को कोरापुत जेल में रखा गया है।"
उन्होंने कह कि प्रसादम के वकील ने शनिवार को एक स्थानीय अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था जिसे खारिज कर दिया गया। उसकी जमानत के लिए सोमवार को एक बार फिर जमानत याचिका पेश की जा सकती है।
नक्सलियों ने राज्य के जेलों में बंद अपने साथियों की रिहाई की भी मांग की है। इनमें से कम से कम सात कट्टर नक्सली हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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