अरब जगत में अशांति की लहर, कई देशों में सरकार विरोधी प्रदर्शन (लीड-1)

विरोध प्रदर्शनों में कई लोग मारे जा चुके हैं और तमाम अन्य घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इन देशों में तत्काल सुधारों को लागू करने की वकालत की है।

लीबिया और बहरीन अशांति की इस आग से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लीबिया में मुअम्मार गद्दाफी 1969 से ही सत्ता पर काबिज हैं। प्रदर्शनकारी गद्दाफी से गद्दी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।

लीबिया में 27 लोग मारे गए :

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लीबिया में शुक्रवार को 27 लोग मारे गए। इससे पहले गुरुवार तक यहां 45 लोग मारे जा चुके थे।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक उत्तर पूर्वी शहर बेंगझई में शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान 25 लोगों की मौत हुई। मरने वाले लोगों की संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात तक राजधानी त्रिपोली के अधिकांश इलाकों में फैल गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पश्चिमी शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे।

विपक्षी दल नेशनल फ्रंट फॉर द सल्वेशन ऑफ लीबिया (एनएफएसएल) के मुताबिक उत्तरी शहर कुबाह में भी दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है।

लीबिया के एक प्रदर्शनकारी ने नेटवर्किं ग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, "हम गद्दाफी से कोई समझौता नहीं चाहते और न ही उनके बेटे से कोई रिश्वत। हम उनका इस्तीफा चाहते हैं। हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।"

एनएफएसएल ने कहा कि तैजोरा में स्थित अल-जडैडा जेल में आग लगने के बाद कैदी भाग गए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि आग कैसे लगी।

लीबिया की एक वेबसाइट के मुताबिक बेंगझई और उत्तरी शहरों की कुछ अन्य जेलों से भी कैदियों के भागने की अपुष्ट खबरें हैं।

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा है कि लीबिया में अब तक 84 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।

एचआरडब्ल्यू के मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के उपनिदेशक जो स्टोर्क ने कहा, "गद्दाफी के सुरक्षा बल लीबियाई लोगों पर गोलीबारी कर रहे हैं। बदलाव की मांग कर रहे लोगों की हत्या की जा रही है।"

बहरीन में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी :

मनामा में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सनिकों द्वारा की गई गोलीबारी में कम से कम 66 व्यक्ति घायल हो गए। दूसरी ओर बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल-खलीफा ने अपने सबसे बड़े बेटे से कहा है कि गम्भीर हो रहे राजनीतिक संकट के हल के लिए वह एक राष्ट्रीय संवाद शुरू करें।

बीबीसी के अनुसार शहजादा शेख सलमान बिन हमद अल-खलीफा को सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए अधिकृत किया गया है।

प्रदर्शनकारी, पूर्व की हिंसा में मारे गए चार व्यक्तियों के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के बाद राजधानी मनामा के मध्य शुक्रवार को जुलूस निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 50 लोग घायल हो गए।

अल जजीरा ने हमले में घायल हुए लोगों की संख्या 66 बताई है।

बहरीन के सरकारी टीवी पर शाहजादा सलमान ने इन पीड़ादायक दिनों के लिए अफसोस जताया और एकता का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हम एक चौराहे पर खड़े हैं। युवक यह मानकर सड़कों पर उतर रहे हैं कि देश में उनका कोई भविष्य नहीं है, जबकि अन्य लोग उनके प्रति प्रेम और वफादारी जताने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। लेकिन यह देश आप सभी का है, शिया और सुन्नी सभी का।"

यमन में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी :

यमन में भी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। लगभग 500 लोगों ने शनिवार को सना विश्वविद्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इसके पहले शुक्रवार को दक्षिणी शहर अदन में लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने दो सरकारी इमारतों पर धावा बोला और उन्हें आग के हवाले कर दिया था।

राष्ट्रपति सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार जारी विरोध प्रदर्शन शनिवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। सालेह पिछले 32 वर्षो से सत्ता में हैं।

दूसरी ओर समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक स्थानीय पार्षद के हवाले से कहा है कि शुक्रवार को लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने अदन में स्थानीय परिषद की दो इमारतों और एक पुलिस थाने पर धावा बोल दिया और उन्हें आग के हवाले कर दिया। इस घटना में कई लोग घायल हो गए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यमन के अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे सरकार विरोधी प्र्दशनों को रोकने के लिए अधिक बल प्रयोग न करें, क्योंकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा में कई व्यक्ति घायल हो गए हैं।

वेबसाइट यमनपोस्ट डॉट नेट ने कहा है कि दक्षिणी शहरों, तईज एवं अदन में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर अलग-अलग किए गए दो हमलों में चार व्यक्ति मारे गए थे और दर्जनों घायल हो गए थे।

जोर्डन में सरकार विरोधी प्रदर्शन:

जोर्डन की राजधानी अम्मान में सरकार विरोधी और सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत में कम-से-कम आठ लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारी संवैधानिक सुधार और निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी चाहते हैं।

ईरान के प्रेस टीवी के मुताबिक सरकार विरोधी लगभग 2,000 प्रदर्शनकारियों पर सरकार समर्थकों ने बल्लों, पाइप और पत्थरों से हमला कर दिया। घायलों में एक पत्रकार भी है।

सरकार समर्थक कुछ प्रदर्शनकारियों ने समाचार चैनल अल-जजीरा पर असंतोष भड़काने का आरोप लगाया है।

सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीति के विरोध में आंदोलन भड़कने के बाद शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने मंत्रिमंडल भंग कर दिया है।

नए प्रधानमंत्री मारुफ बखित ने शाह के निर्देश लागू करने, वास्तविक आर्थिक और राजनीतिक सुधार करने तथा चुनाव कानून में सुधार का वादा किया है।

अल्जीरिया में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात :

अल्जीरिया में विपक्ष की प्रस्तावित रैली के पहले ही प्रशासन ने शनिवार को राजधानी अल्जीयर्स के ज्यादातर हिस्सों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों और दंगा विरोधी पुलिस को तैनात कर दिया।

स्थानीय समाचार पत्र 'अल-खबर' ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि पिछले सप्ताह प्रदर्शन का केंद्र रहे 'मे 1 स्क्वे यर' पर पुलिस मौजूद है।

नागरिक समाज समूहों और विपक्षी दलों के सर्वोच्च संगठन 'द नेशनल कोआर्डिनेशन फॉर चेंज एंड डेमोक्रेसी' ने रैली का आह्वान किया है।

विपक्ष ने कहा है कि वह देश में वर्ष 2001 से प्रदर्शनों पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करेगा।

उल्लेखनीय है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और बेरोजगारी के खिलाफ गत जनवरी में देश भर में प्रदर्शन हो चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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