आंध्र में विधायकों का राज्यपाल से दुर्व्यवहार, मुख्यमंत्री ने माफी मांगी (राउंडअप)
राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन ने गुरुवार को जैसे ही दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को सम्बोधित करना आरम्भ किया, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
उधर, तेलंगाना क्षेत्र के लगभग 3,00000 सरकारी कर्मचारियों ने पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग के समर्थन में असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया है।
राज्यपाल के अभिभाषण में तेलंगाना का जिक्र कम होने की वजह से विधायक हंगामा करने लगे और उन्होंने पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग की। उन्होंने राज्यपाल के हाथों से अभिभाषण की प्रति छीनने की कोशिश की और 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे भी लगाए। कुछ विधायकों ने तो अभिभाषण की प्रतियां फाड़कर हवा में उछाल दी।
हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
टीआरएस, तेदेपा और तेलंगाना समर्थक अन्य विधायकों ने राज्यपाल पर तेलंगाना विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना विरोधी होने की वजह से उन्हें तेलंगाना की भूमि पर विधानसभा को सम्बोधित करने का अधिकार नहीं है।
विधायकों के विरोध को देखते हुए राज्यपाल ने महज 15 मिनटों में अपना अभिभाषण समाप्त कर दिया। राज्यपाल का अभिभाषण 40 पृष्ठों का था लेकिन वह अभिभाषण के कुछ ही पृष्ठ पढ़ पाए। इस दौरान सदन में मौजूद मार्शलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के तेलंगाना क्षेत्र के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। संसद में तेलंगाना प्रस्ताव लाने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से वे दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
तेदेपा के नेता एन. जर्नादन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी शुक्रवार को अपने रुख पर कायम रहेगी। उन्होंने कहा, "हम अपना विरोध तब तक जारी रखेंगे जब तक इस मुद्दे को लेकर संसद में विधेयक नहीं लाया जाता और विधानसभा में अलग तेलंगाना राज्य के लिए प्रस्ताव नहीं पारित किया जाता।"
इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री रेड्डी ने विधानसभा में हुए हंगामे के लिए गुरुवार को राज्यपाल नरसिम्हन से माफी मांगी है। उन्होंने राज्य विधानसभा के इतिहास में इसे काला दिन बताते हुए संवाददाताओं से कहा कि सदन के अंदर और परिसर में जो घटनाएं हुईं वे शर्मनाक हैं।
उन्होंने कहा, "यह काला दिन था. हम शर्मिदा महसूस कर रहे हैं. और सभी की ओर से राज्यपाल से माफी मांगते हैं।" रेड्डी ने नरसिम्हन से मुलाकात के लिए राजभवन पहुंचने से पहले मीडिया को सम्बोधित किया।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में लोकसत्ता पार्टी प्रमुख जयप्रकाश नारायण पर हुए हमले की भी निंदा की। रेड्डी ने कहा, "लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार और स्वतंत्रता है।" जयप्रकाश ने विधानसभा में राज्यपाल के भाषण के दौरान विधायकों के व्यवहार की निंदा की थी, जिस पर टीआरएस के सदस्यों ने कथित तौर पर उनके साथ मार-पीट की।
रेड्डी ने कहा कि विधानसभा उपाध्यक्ष नान्देन्दला मनोहर मामले की समीक्षा के बाद उचित कार्रवाई करेंगे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएंगे।
गौरतलब है कि जयप्रकाश आंध्र प्रदेश के विभाजन के विरोध में हैं। उन्होंने कहा था कि यदि टीआरएस विधायकों का ऐसा रवैया जारी रहा, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए। इसके तुरंत बाद टीआरएस विधायकों ने उनके साथ बहस शुरू कर दी और 'जय तेलंगाना' के नारे लगाए। इसी दौरान पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने पर भी एक विधायक ने जयप्रकाश के सिर पर वार कर दिया। जयप्रकाश ने विधानसभा उपाध्यक्ष से इसकी शिकायत की है।
जयप्रकाश के अलावा तेलंगाना समर्थक विधायकों ने कांग्रसी विधायक पी.वेंकट राव के साथ भी धक्का-मुक्की की।
इस घटना पर दुख जताते हुए लोकसत्ता प्रमुख ने कहा कि वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। कांग्रेसी विधायकों ने हालांकि उनसे ऐसा न करने का अनुरोध किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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