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मनुष्‍य नहीं दरिंदा है निठारी का सुरिंदर कोली

Surinder Koli
नई दिल्‍ली। निठारी केस के मुख्‍य अभियुक्‍त सुरिंदर कोली को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा दे दी। अभी भी उसके पास राष्‍ट्रपति के सामने अपनी सज़ा माफ कराने का अधिकार है, लेकिन आप क्‍या सोचते हैं राष्‍ट्रपति को ऐसे मनुष्‍य को माफ करना चाहिए। अरेरे मनुष्‍य नहीं ये तो दरिंदा है और दरिंदों को जितनी जल्‍दी मार दें, उतना अच्‍छा।

वे सभी लोग सुरिंदर कोली की काली करतूतों से वाकिफ होंगे, जो पिछले पांच साल से इस मामले के एक-एक पहलु के बारे में जानकारी रख रहे हैं, लेकिन वे लोग, इस केस के बारे में ज्‍यादा नहीं जानते, उन्‍हें सीबीआई की तफतीश के बारे में जानकारी हो या नहीं, कोली के बारे में जरूर जानना चाहिए।

बंगला नंबर 10 में बतौर नौकर काम करने वाला 39 वर्षीय सुरिंदर कोली अपने गेट पर नज़र रखता था। शाम ढलते वक्‍त जब इलाके में सन्‍नाटा छा जाता था, तब वो गेट के पास से निकलने वाली लड़कियों को पकड़ लेता और मुंह में कपड़ा ठूस कर उनके साथ बलात्‍कार करता था। उसके बाद उन लड़कियों की हत्‍या कर उनके शव के कपड़े उतार कर फिर से बलात्‍कार करता था।

कोली की हैवानियत तब तो चरम पर होती थी, जब वो उन्‍हीं लड़कियों के शव के टुकड़े कर उन्‍हें खाता था और बचे कुचे टुकड़ों को बंगले के कंपाउंड में दफ्ना देता था। ये सभी बातें कोली ने नारको टेस्‍ट में खुद कबूली हैं।

कोली का पर्दाफाश 2006 में तब हुआ जब रिंपा हलधर और पिंकी सरकार के अगवा होने का मामला नोएडा पुलिस में दर्ज हुआ। पुलिस ने बहुत कोशिशें कीं लेकिन नाकाम रही। 29 दिसंबर 2006 को बंगले के पीछे कुछ नर कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने तफतीश तेज की और फिर बंगले के कंपाउंड में खुदाई की, जिसमें रिंकी और रिंपा समेत कुल 15 बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए।

पुलिस ने कोली और बंगले के मालिक पंढेर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। 3 जनवरी 2007 को केंद्र सरकार ने जांच समिति गठित की। 4 जनवरी को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच से इंकार कर दिया। 6 जनवरी को पुलिस पर सवाल उठे। 9 जनवरी को और बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए। 10 जनवरी को सीबीआई ने मामला अपने हाथों में ले लिया।

22 मार्च को सीबीआई ने पंढेर को क्‍लीन चिट दे दी। 10 अप्रैल को सीबीआई ने पंढेर और कोली के खिलाफ 20 वर्षीय पिंकी सरकार को अगवा कर रेप व हत्‍या का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की। 12 फरवरी 2008 को निचली अदालत ने पंढेर और कोली को मौत की सजा सुनाई। 11 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पंढेर को क्‍लीन चिट दे दी। उसके बाद 7 जनवरी 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की सजा पर रोक लगा दी। 15 फरवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की फिर से सुनवाई करे हुए कोली को मौत की सजा सुना दी।

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