हरियाणा के दो अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय से राहत
अदालत की अवमानना मामले में फंसे ये दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। टी.सी. गुप्ता नगर एवं देश योजना तथा शहरी संपदा विभाग के विशेष सचिव हैं और पी.पी. सिंह जिला योजनाकार (मुख्यालय) विभाग के निदेशक हैं।
उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी को कहा था कि अदालत की अवमानना कानून के तहत इन्हें क्यों न सजा दी जाए।
शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति पी. सतशिवम तथा न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खंडपीठ ने उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को जारी नोटिस पर तब रोक लगा दी, जब महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने अदालत से कहा कि इन अधिकारियों ने अदालत द्वारा मांगी गई पूरी जानकारी दे दी थी।
उच्च न्यायालय ने 17 जनवरी को राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत भूस्वामियों की भूमि से जुड़े कितने मामलों में उसने आपत्ति दर्ज नहीं कर आपसी समझौते की प्रकिया के जरिए भूमि आवंटित की।
उच्च न्यायालय ने अधिकारियों के कृत्य को 'गुमराह करने' का प्रयास मानते हुए संज्ञान लिया और कहा कि "माफी तभी दी जाएगी जब यह बिना शर्त होगी। यह हलफनामा दायर कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।"
अदालत ने कहा, "अदालत द्वारा उठाया गया सवाल बेहद सरल और सीधा था..ऐसे में यह दलील कि बयान देने वाले (अधिकारी) ने अदालत के सवाल को ठीक से नहीं समझा, झूठी प्रतीत होती है।"
उच्च न्यायालय ने कहा, "हम इससे संतुष्ट हैं कि इन अधिकारियों को अदालत द्वारा पारित आदेश की जान-बूझकर अवमामना का दोषी माना गया है।"
उल्लेखनीय है कि यह मामला सोनीपत के सेक्टर-8 व 19 में आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर विकसित करने के लिए ग्रामीणों की भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। इसमें रियल एस्टेट कम्पनियों की भी संलिप्तता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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