मनमोहन के प्रयास बावजूद पैतृक गांव का विकास नहीं
स्थानीय समाचार पत्र 'डान' के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में इस गांव को 'मॉडल विलेज' घोषित किया गया था लेकिन गांव के निवासियों का कहना है कि विकास के सभी काम रुके हुए हैं।
गांव में स्कूल के निर्माण, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र और पशु चिकित्सालय के निर्माण के लिए लाखों रुपये की राशि आवंटित की गई लेकिन स्कूल की इमारत आधी ही बन पाई है और पशु चिकित्सालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र में अभी कर्मचारी पदस्थ नहीं हुए हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रस्ताव पर भारतीय ऊर्जा संसाधन संस्थान (टीईआरआई) ने इस गांव में सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर गीजर, और बायो-गैस प्लांट निर्मित किए और लोगों को सोलर लैंप वितरित किए थे। ज्यादा लोगों का खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ी जलाने के लिए धुंआ रहित संयंत्र भी स्थापित किया गया है।
पाकिस्तानी समाचार पत्र के मुताबिक भारतीय इंजीनियरों ने यहां एक छोटी मस्जिद में भी गीजर लगाया है। 228 घरों वाले इस गांव की आबादी 2,000 है।
अभी तक पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने यहां वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत्र स्थापित करने के कोई प्रयास नहीं किए हैं। खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ी जलाने के लिए धुंआ रहित संयंत्र अभी तक शुरू नहीं किया गया और इसके लिए पाकिस्तानी प्रशासन कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
गह प्राथमिक स्कूल के शिक्षक गुलाम मुर्तजा ने मनमोहन सिंह के कक्षा दूसरी और तीसरी के रिपोर्ट कार्ड दिखाए। इस स्कूल ने जिस रजिस्टर में सिंह का नाम स्कूल में दर्ज करने का विवरण लिखा है उसे सुरक्षित रखा है। पहली कक्षा में सिंह का नामांकन क्रमांक 187 था।
मुर्तजा के पिता सिंह की कक्षा में ही पढ़ते थे। मुर्तजा ने कहा, "इस स्कूल में शिक्षण कार्य करना दोहरे गर्व का विषय है क्योंकि यहां मेरे पिता सिंह के साथ पढ़ते थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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