कोई भी सरकार मजबूत न्यायपालिका नहीं चाहती : सर्वोच्च न्यायालय
न्यायमूर्ति जी.एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने यह टिप्पणी अमर सिंह फोन टैपिंग मामले की सुनवाई के दौरान की।
उन्होंने कहा कि देश में जब तक पर्याप्त संख्या में न्यायालय नहीं होंगे "तब तक आरोपपत्र भरने के बाद आरोप तय करने में चार वर्ष अथवा उससे अधिक समय लगेगा और इसके बाद मुकदमे के फैसले का लंबा इंतजार करना होगा।"
न्यायालय ने कहा कि बिना किसी परिणाम के न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए समिति के बाद समिति का गठन किया जा रहा है। न्यायाधीश गांगुली ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उन्होंने जो टिप्पणी की है वह उनकी निजी राय है।
देश भर के न्यायालयों में सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत रिक्त स्थानों का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि यदि सरकार बजट आवंटन में इजाफा करे तो इस स्थिति में सुधार हो सकता है।
न्यायाधीशों ने कहा कि नए लोगों को प्रशिक्षित करने में अच्छे न्यायिक अधिकारियों की कमी का सामना फिर भी करना पड़ेगा। न्यायालय ने इस बात का उल्लेख किया कि न्यायिक कामकाज को निपटाने के लिए उसके पास पर्याप्त लोग नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अमर सिंह फोन टैपिंग मामले में आरोप तय होने में चार साल लग गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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