दुनिया में दोगुनी हो गई मोटों की संख्या

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एक ताज़ा अध्ययन से पता चला है कि दुनिया के दस में से एक व्यक्ति मोटापे का शिकार है. इसके अनुसार पिछले तीस सालों में दुनिया में मोटापे का शिकार लोगों की संख्या दोगुनी हो गई है. यह अध्ययन अमरीका और ब्रिटेन ने मिलकर किया है और इसके परिणाम लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं.

लंदन के इंपिरियल कॉलेज और हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने वर्ष 1980 से 2008 के बीच लोगों के बॉडी मास इंडेक्स (बीएसआई), कॉलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप का अध्ययन किया. शोधार्थियों का कहना है कि कई विकसित देशों में तो हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटा है लेकिन मोटापा पूरी दुनिया में बढ़ा है.

मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल तीनों ही दिल की बीमारियों का कारण हो सकते हैं. आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2008 में दुनिया के 9.8 प्रतिशत पुरुष और 13.8 प्रतिशत महिलाएँ मोटापे का शिकार थीं और उनका बीएमआई 30 से अधिक था. अगर इसकी तुलना 1980 के आंकड़ों से करें तो उस समय 4.8 प्रतिशत पुरुष और 7.9 प्रतिशत महिलाएँ मोटापे का शिकार थे.

प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में मोटापा पूरी दुनिया में सबसे अधिक है और वहाँ बीएमआई का औसत 34 से 35 के बीच है. यह दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों और उप सहारीय अफ़्रीकी देशों की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक है. लेकिन शेष दुनिया में मोटापे का संबंध आय से रहा है और अधिक आय वाले देशों में मोटापा अधिक बढ़ा है.

वर्ष 1980 से 2008 के बीच अमीर देशों में सबसे अधिक बीएमआई अमरीका में बढ़ा. इसके बाद महिलाओं में न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का नंबर आता है जबकि पुरुषों के मोटापे के मामले अमरीका के बाद सबसे अधिक ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में मिले. पश्चिमी यूरोप के कुछ देशों में लोगों ने अपने बीएमआई का स्तर यथावत बनाए रखने में सफलता पाई है.

बेल्जियम, फ़िनलैंड, फ्रांस, इटली और स्विट्ज़रलैंड में महिलाओं के बीएमआई में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई. जबकि इटली और स्विट्ज़रलैंड में पुरुषों के बीएमआई में मामूली सी ही बढ़त दर्ज की गई. जबकि अमीर देशों में मोटापे में बढ़ोत्तरी हुई कई देशों ने इसी समय में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में कमी लाने में सफलता पाई है.

कई देशों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में कमी आई है. महिलाओं के मामले में ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमरीका में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में कमी आई है. जबकि पूरी दुनिया में ही हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में कमी आई है. यूरोपीय देशों में देखें तो ब्रिटेन में ब्लड प्रेशर के मामलों में कमी सबसे कम ही आई है.

पूर्वी और पश्चिमी अफ़्रीकी देशों और बाल्टिक देशों में ब्लड प्रेशर का स्तर सबसे अधिक रहा. जबकि ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमरीका, यूरोप सहित कई पश्चिमी देशों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर काफ़ी घटा है. जबकि पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया में और प्रशांत क्षेत्र में ख़ून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में बढ़ोत्तरी हुई.

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