क्या होता है जब डॉक्टर जाते हैं हड़ताल पर?

मर्चरी से शवरों के निकलने का दौर जारी है। यह तो सिर्फ ऊपरी तस्वीर है। सही मायने में जब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं, तो अस्पताल के अंदर और बाहर की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है।
पीएमसीएच में पहले भी कई बार डॉक्टर हड़ताल पर जा चुके हैं, हर बार की तरह इस बार भी इस हड़ताल का फायदा उठाने में जुट गए हैं प्राइवेट नर्सिंग होम। जी हां डॉक्टरों के हड़ताल पर जाते ही शहर के कई प्राइवेट अस्पतालों की मानों लॉटरी लग गई है। समाज की सेवा करने के संकल्प को भूल चुके डॉक्टर मनमानी रकम वसूलने में जुट गए हैं।
पटना के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही वेंटीलेटर की व्यवस्था है। पीएमसीएच में हड़ताल के कारण लोग अपने गंभीर मरीजों को प्राइवेटनर्सिंग होम में लेकर जा रहे हैं। खबर है कि लगभग सभी प्राइवेट नर्सिंग होमों के वेंटीलेटर बेड फुल हो चुके हैं। हम आपको बता दें, कि वेंटीलेटर निजी अस्पतालों के लिए वो मशीन है, जिसमें रात भर में 30 से 50 हजार रुपए तक का खर्च आता है।
पटना की पाटलीपुत्र कालोनी के किश्वर सिन्हा ने बताया कि बुधवार को उन्होंने अपने पिता को राजेंद्रनगर स्थित एक निजी अस्पतालों में भर्ती कराया। डॉक्टर ने उन्हें वेंटीलेटर पर रख दिया। रात भर में 65 हजार रुपए का बिल बन चुका है, जिसमें वेंटीलेटर, डॉक्टर की फीस ही 25 हजार रुपए है। वहीं खोजपुरा के निवासी राजेंद्र चौरसिया ने बताया कि बुधवार को उनके छोटे भाई की तबियत बिगड़ गई। पीएचएमसी में हड़ताल के कारण वो अपने ही इलाके में स्थित प्राइवेट नर्सिंग होम गए, जहां डॉक्टरों ने एडमिट करते ही 10 हजार रुपए जमा करा लिए। फिलहाल इलाज जारी है, बिल कितना आएगा यह चौरसिया को खुद भी नहीं पता।
हम आपको बता दें कि पटना के अधिकांश निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर वो हैं, जो सरकारी अस्पतालों में नौकरी छोड़ कर आए हैं। यहां उन्हें एक विजिट का 400 से 1000 रुपए तक मिलते हैं। खबर यह भी है कि हड़ताल के बाद से कई निजी डॉक्टर मरीज लाने वाले रिक्शे वालों को कमीशन भी दे रहे हैं।
कुल मिलाकर देखें तो इस हड़ताल से अमीर तबके के लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है, पिस रहा है तो गरीब आदमी, जिसके पास वेंटीलेटर तो दूर की बात, दवा खरीदने तक के पैसे नहीं होते हैं। यह कहानी सिर्फ पटना की ही नहीं है, ऐसा उन सभी शहरों में होता है, जहां चिकित्सा के नाम पर धंधा किया जा रहा है।
अब आपका क्या कहना है इन निजी अस्पतालों के बारे में? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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