मुबारक पर दबाव बढ़ा, जल्द बयान देंगे

मुबारक पर दबाव बढ़ा, जल्द बयान देंगे
काहिरा के तहरीर चौक पर उत्सव जैसा माहौल है. मिस्र में लाखों लोग राजनीतिक सुधारों और राष्ट्रपति मुबारक के इस्तीफ़े की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. आयोजकों को उम्मीद है कि वो दस लाख से ज़्यादा लोगों को जुटा पाएंगे.

माहौल उत्सव जैसा है, लोग गाना गा रहे हैं, ढोल बजा रहे हैं और मुबारक के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं.

तहरीर चौराहे का माहौल

विपक्षी नेता अल बारादेई समेत कई अन्य लोगों ने राष्ट्रपति मुबारक से इस शुक्रवार तक सत्ता छोड़ देने का मांग की है. अल बारादेई ने अल अरबिया टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, “लोगों को उम्मीद है कि ये सब आज या ज़्यादा से ज़्यादा शुक्रवार तक ख़त्म हो जाएगा. लेकिन मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति मुबारक उसके पहले ही 30 सालों की सत्ता को छोड़ देंगे और लोगों को मौका देंगे क्योंकि मुझे नहीं लगता कि वो भी और ख़ूनखराबा देखना चाहेंगे."

इस बीच विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी बातचीत में तबतक हिस्सा नहीं लेंगे जबतक मुबारक इस्तीफ़ा नहीं दे देते. उन्होंने कहा है कि वो एक गठबंधन बना चुके हैं जो बदलाव की चाह रखनेवालों के प्रतिनिधि के तौर पर बात करेंगे.

लोग गाना गा रहे हैं, ढोल बजा रहे हैं, नारे लगा रहे हैं. अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी समझे जानेवाले वरिष्ठ नेता जॉन केरी ने भी राष्ट्रपति मुबारक से पद छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि उन्हें अब फिर से चुनाव में नहीं खड़ा होना चाहिए.

वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि जो भी नई सरकार बनती है वो इसराइल और मिस्र की शांति संधि का सम्मान करेगी.

बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता जॉन सिंपसन का कहना है कि ये प्रदर्शन उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए जिसकी उम्मीद थी और इसलिए ये नहीं लग रहा कि आर या पार वाली स्थिति दिखेगी.

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उनका कहना है कि संभवत: प्रदर्शनकारी एक बार फिर शुक्रवार को ज़ोर लगाएंगे और राष्ट्रपति भवन तक रैली निकालेंगे. सिंपसन का कहना है, “उसके बाद ख़तरा इस बात का भी है कि ये आंदोलन अपनी गति खो दे. लेकिन ये सोचना फिर भी मुश्किल है कि मुबारक इतने बड़े झटके के बाद सत्ता में बने रह सकेंगे."

इस राजनीतिक अंसतोष का असर मिस्र की अर्थव्यवस्था पर भी नज़र आ रहा है. बैंक बंद हैं, ये अंदाज़ा भी नहीं है कि वो कब खुलेंगे और मुख्य शहरों में कारोबार ठप्प सा है.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वाकर का कहना है कि इस माहौल का असर विदेशी निवेश पर भी पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका असर दिखेगा यदि स्वेज़ नहर से आवाजाही बंद हो जाती है.

फ़िलहाल ये चल रहा है लेकिन इसमें किसी तरह की अड़चन से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर होगा. मिस्र की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है लेकिन इन प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद से बहुत सारे पर्यटक देश छोड़कर निकल रहे हैं.

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