अमर सिंह फोन टैपिंग मामले में सरकार की खिंचाई
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और ए.के.गांगुली की पीठ ने कहा कि इस तरह के गम्भीर मामले में सभी ने लापरवाहीपूर्ण एवं अस्पष्ट हलफनामें दाखिल किए हैं।
अदालत ने कहा, "यह बहुत ही गम्भीर मुद्दा है, जबकि सभी हलफनामें बहुत ही लापरवाही के साथ दाखिल किए गए हैं।"
अदालत ने महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम से कहा कि वह निचली अदालत जाने से पहले आपराधिक साजिश सम्बंधी मामले पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।
अमर सिंह की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने यह कह कर इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है कि जिस पत्र पर अमर सिंह का फोन टैप किया गया था, वह फर्जी था। फिर भी निजता के अधिकार का उल्लंघन किया गया और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
साल्वे ने कहा कि उनके मुवक्किल के निजता के अधिकार की हिफाजत करने की केंद्र सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी थी। साल्वे ने कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाता कम्पनियां केंद्र सरकार के लाइसेंस पर काम कर रही थीं।
अमर सिंह के फोन टैपिंग मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। प्रारम्भ में सिंह ने आरोप लगाया था कि वह अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा निशाना बनाए गए हैं।
ज्ञात हो कि अमर सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व नेता हैं और राज्यसभा सदस्य हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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