बेनतीजा रही विदेशों में जमा काले धन पर कैबिनेट की बैठक
उन्होंने कहा था, "काले धन को वापस लाने का कोई त्वरित तरीका नहीं है। हमें कुछ सूचनाएं मिली हैं और वह हमें कर संग्रह के लिए मिली है।" दरअसल विदेशी बैंकों में अवैध धन जमा करने वाले भारतीयों के नाम उजागर करने में केंद्र सरकार की अनिच्छा को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि वो 15 खरब डॉलर की 'राष्ट्रीय लूट' में शामिल लोगों के नाम क्यों सार्वजनिक नहीं कर रही है? इस बाबत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को नये मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने डांट खाने के बाद केंद्र सरकार ने केंदीय मंत्रिमंडल के साथ विदेशों में जमा काले धन को घर वापस लाने के मुद्दे पर चर्चा की। सरकार की इस मीटिंग पर चर्चा एक तरह से बेनतीजा ही साबित हुई क्योंकि मीटिंग से बाहर निकलने वाले सदस्यों ने प्रधानमंत्री के पूर्व बयान जैसे ही बयान मीडिया को दिए।
मालूम हो कि, विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने काले धन के बाबत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए बयानों को गैरजिम्मेदाराना करार दिया है। गुरुवार को आडवाणी ने भाजयुमो के एक कार्यक्रम में कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अवैध तरीकों से जोड़ा और विदेशों में जमा किया गया काला धन राष्ट्रीय लूट का सूचक है और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद गुरुवार हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार इस पर चर्चा को बाध्य हुई है।"
यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के सामने तब आया जब वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी ने जर्मनी की सरकार की सूचनाओं के साझा करने की इच्छा पर सरकार को कदम उठाने के लिए अदालत द्वारा निर्देश दिए जाने की मांग की। जर्मनी की सरकार ने वहां बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसे के बारे में सूचना साझा करने की इच्छा जताई थी। माना जा रहा है कि विदेशों में 15 खरब डॉलर काला धन जमा है, जो भारत के कुल घरेलू उत्पादन का डेढ़ गुना है।













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