प्याज के बढ़े दाम के लिए जिम्मेदार कौन जमाखोर या सरकार?
बैंगलोर। आईटी शहर बैंगलोर में प्याज की कीमत 60-70 रूपये के बीच, दिल्ली में 50-60 के बीच, मुंबई में 70-80 रूपयों के बीच है। ध्यान रहे ये इन शहर की थोक मंडियों के दाम है, जब ये फुटकर विक्रेताओं के हाथ में आयेंगे तो प्याज की कीमत में आप 10-20 रूपये और जोड़ लीजिये। दिखने में मामूली लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद और स्वाद में जायकेदार प्याज में आखिरकार ऐसा क्या हुआ जिसके चलते इस के दाम आसमान छूने लगे।
थोक विक्रेताओं का कहना है कि प्याज की बढ़ती कीमत के लिए सिर्फ और सिर्फ जमाखोर जिम्मेदार हैं, उन्हें पहले से खबर थी कि प्याज की नई फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है, जिसके चलते आने वाले समय में प्याज की मांग बढ़ेगी, और वैसा ही हुआ भी। प्याज की मांग बढ़ी सो उन्होंने दाम भी बढ़वा दिया ।
जबकि कृषि मंत्री से महंगाई मंत्री बन चुके शरद पवार ने इसके लिए भौतिक परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है। अब कोई उनसे पूछे कि आखिर इस समस्या का समाधान क्या है? लगभग दस दिन पहले जब पड़ोसी मुल्क ने प्याज के जरिये आंसू पोंछे थे तो लगा था कि शायद इस आफत से जल्द निपटारा मिल जायेगा लेकिन यहां भी एक बार राजनीति सामने आ गई। पाकिस्तान ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी।
अगर उसने ऐसा किया तो कोई नई बात नहीं है, उसने वो ही किया जो हर समझदार इंसान करता है। सवाल ये उठता है कि आखिऱ भारत सरकार ने क्या किया और वो आगे क्या करने वाली है। केन्द्र ने जिसको कृषि मंत्रालय दिया है वो साग-सब्जियों के बजाय क्रिकेट में ज्यादा व्यस्त रहता हैं। राज्य सरकारें केन्द्र पर दोष मढ़ रही है और केन्द्र है कि चुप्पी साधे खड़ा है।
केवल प्याज ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की हर चीज की कीमत में दूना-चौगुना इजाफा है। हर दो महीने पर पैट्रोल के दाम बढ़ जाते है, दूध महंगा हो जाता है। अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं कि इंसान केवल सब्जियों और फलों को सूंघ कर अपना पेट भरेगा। क्या इस दिन के लिए हमने अपने राजनेताओं को संसद भेजा था कि वो अपनी कारागुजारी के चलते आम आदमी की कमर ही तोड़ दें। इंसान की आमदनी में बढ़ोत्तरी हो नहीं रही और खर्चा है कि बढ़ता जा रहा है।
अब आप ही बताइये आप इस महंगाई के लिए किसको जिम्मेदार मानते हैं। अपनी प्रतिक्रिया नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में लिखे।












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