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बोफोर्स मामले में CBI को कोर्ट ने सही ठहराया

नई दिल्ली। ठंडे बस्ते में पड़ा बोफोर्स मामला एक बाऱ फिर से जिंदा हो गया है। जहां एक तरफ कहा जा रहा है कि केस को बंद कर दिया जाये वहीं दूसरी ओर विद्रोही इस मुद्दे पर राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे है। फिलहाल मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विनोद यादव ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की इस दलील को सही ठहराया कि इटली के व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को जारी आयकर नोटिस का बोफोर्स दलाली मामले के आपराधिक पहलु से कोई सम्बंध नहीं है।

न्यायाधीश ने उस आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें सीबीआई और केंद्र सरकार से यह पूछा गया था कि क्या क्वात्रोच्चि के खिलाफ आपराधिक मामले को बंद करने की मांग के सम्बंध में उनके रुख में कोई बदलाव तो नहीं आया है। न्यायालय का यह आदेश आयकर न्यायाधिकरण की उस रिपोर्ट के तीन दिन बाद आया है जिसमें कहा गया था कि क्वात्रोच्चि और उसके भारतीय सहयोगी विन चड़्डा को 1986 के बोफोर्स तोप सौदे में 41.2 करोड़ रुपये की दलाली दी गई थी।

न्यायालय ने कहा कि वह सीबीआई की इस दलील से संतुष्ट है कि आयकर आदेश, एक कर संबंधी मुद्दा है न कि मामले का आपराधिक पक्ष।मंगलवार को सीबीआई से पूछा गया था कि न्यायाधिकरण के आदेश के संदर्भ में क्या उसे सरकार से कोई नया निर्देश मिला है।सीबीआई ने वर्ष 1999 में पूर्व रक्षा सचिव एस. के. भटनागर, क्वात्रोच्चि, चड्डा, पूर्व बोफोर्स प्रमुख मार्टिन अर्दबो और कम्पनी को आरोपी ठहराया था। वर्ष 1989 में इस मामले के चलते कांग्रेस पार्टी लोकसभा का चुनाव हार गई थी।भटनागर, अर्दबो और चड्डा की मौत हो चुकी है। अब इस मामले में क्वात्रोची अकेला जीवित आरोपी है जो भारत में न्यायालय के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ।

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