अपराध मु्क्त है उत्तर प्रदेश का एक गांव
अगर आप यह सोचते हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराध-मुक्त होने का दावा केवल तख्ता गांव के लोग ही कर रहे हैं, तो ऐसा नहीं है। पुलिस के रिकार्ड भी उनके दावों पर मुहर लगाते हैं। सहजनवा थाने के रिकार्ड में यह गांव डेढ़ दशक से बिल्कुल बेदाग है। सहजनवा थाने के कार्यकारी थाना प्रभारी लल्लन सिंह ने आईएएनएस से कहा, "तीन साल पहले जब इस थाने में मेरी तैनाती हुई थी तो मुझे इस गांव की खासियत जानकर बहुत आश्चर्य हुआ था। हत्या या अपहरण जैसे बड़े अपराधों को तो छोड़ ही दीजिए, पर्स चोरी, झपटमारी और चोरी जैसे छोटे अपराध की शिकायत भी इस गांव से वर्षो से नहीं आई है।"
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यह पूछने पर कि पंद्रह साल पहले यहां कौन-सा बड़ा अपराध हुआ था, उन्होंने असर्थता जताते हुए कहा कि इसके लिए पुराने रिकार्ड खंगालने पड़ेंगे, जिसमें बहुत ज्यादा समय लगेगा। तख्ता गांव भले ही पंद्रह वर्षो से अपराध-मुक्त रहा हो, लेकिन ऐसा नहीं है कि दूसरे गांवों की तरह यहां के लोगों में आपसी मनमुटाव नहीं होता। अगर कभी किसी के बीच मनमुटाव हो भी गया तो गांव के बड़े-बुजुर्ग और पंचायत, गांव की सरहद के अंदर ही मामला सुलझा देते हैं। इसलिए छोटे-मोटे मामले थाने तक नहीं पहुंचते हैं।
एक ग्रामीण शिव प्रताप मिश्रा (65) कहते हैं, "यहां भी लोगों के बीच छोटा-मोटा विवाद होता है, पर वे मामले को लेकर थाने पर न जाकर गांव के बड़े-बुर्जुगों के पास मुद्दा रखते हैं। बड़े-बुजुर्ग जो फैसला करते हैं, दोनों पक्ष खुशी-खुशी उसे स्वीकार कर लेते हैं।" स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े-बुजुर्गो का सम्मान और उनके प्रति भरोसा जताए जाने के कारण आसपास के इलाके में उनके गांव को विशिष्ट पहचान मिली है। गोरखपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर तख्ता गांव की आबादी का 75 प्रतिशत हिस्सा ब्राह्मण बिरादरी का है। 25 प्रतिशत में दलित एवं अन्य जातियां हैं। गांव के ज्यादातर लोग खेती करते हैं और कई घरों के लोग सरकारी और निजी नौकरियों में भी हैं।













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