भारतीय जाति व्यवस्था वाली किताब की समीक्षा करेगा मलेशिया
कुआलालम्पुर, 1 जनवरी (आईएएनएस)। मलेशिया में स्कूली विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई उस पुस्तक की समीक्षा की जा रही है, जिसमें भारतीय जाति व्यवस्था पर सामग्री शामिल है। किताब की यह समीक्षा समुदाय द्वारा चिंता जाहिर किए जाने के बाद की जा रही है। यह जानकारी मलेशिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है।
शिक्षा महानिदेशक अब्दुल गफार महमूद का बयान शुक्रवार को ऐसे समय में आया, जब इसके पहले शिक्षा उप मंत्री वी का सियांग ने कहा था कि उनके मंत्रालय की समीक्षा समिति बदलावों के लिए और मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
मलेशिया में भारतीयों की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, मलेशियन इंडियन कांग्रेस (एमआईसी) के सुझावों पर समीक्षा समिति चर्चा करेगी।
समाचार पत्र 'डेली स्टार' ने महमूद के हवाले से शनिवार को कहा है, "मुझे जो पता है, वह यह कि एमआईसी उन वर्गो में हमसे कुछ बदलाव चाहती है, जिनमें जातीय व्यवस्था के बारे में बातें लिखी गई हैं और हमें समीक्षा समिति के निर्णय का इंतजार करना होगा।"
एमआईसी के उपाध्यक्ष एस.सुब्रमण्यम ने इस सप्ताह के प्रारम्भ में कहा था कि जाति व्यवस्था के संदर्भ, 21 लाख भारतीयों की स्थिति को जाहिर नहीं करते और यदि विद्यार्थियों ने इसे पढ़ा तो उनपर इसका भ्रामक असर होगा। सुब्रमण्यम मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री भी हैं।
'इंटरलॉक' शीर्षक वाली इस पुस्तक को अब्दुल्ला हुसेन ने लिखा है। यह पुस्तक मलय साहित्य के बारे में है और इसमें देश की तीन प्रमुख जातियों के बीच आजादी के पूर्व हुए दैनिक संघर्षो को रेखांकित किया गया है।
लेकिन कुछ लेखकों ने किताब की सामग्री का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इस पुस्तक को समग्रता में पढ़ा जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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