अमरीका के विशेष दूत हॉलब्रुक का निधन

वो अमरीका के सबसे अनुभवी राजनयिक में से एक थे.अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने रिचर्ड हॉलब्रुक को अमरीकी विदेश नीति का एक स्तंभ बताया था और कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में उनकी विशेष भूमिका रही.
हॉलब्रुक की भूमिका
हॉलब्रुक को 1995 के डेटन शांति समझौते में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है. इस समझौते से ही बोस्निया युद्ध का अंत हुआ था.राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जनवरी 2009 में हॉलब्रुक को पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के लिए अपना विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया था.कहा जाता है कि हॉलब्रुक और हामिद करज़ई की एक बार तीखी नौंकझौंक हो गई थीअफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के मामले में ओबामा प्रशासन की विदेश नीति तय करने में हॉलब्रुक की बड़ी भूमिका मानी जाती है.
हॉलब्रुक को बुलडोज़र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कहा जाता है कि वो परस्पर विरोधी नेताओं को बातचीत की मेज तक लाने में कई बार सफल रहे हैं.हॉलब्रुक विदेश मंत्रालय के शीर्ष राजनयिकों में रहे हैं जिन्होंने वियतनाम और संयुक्त राष्ट्र में अमरीका का प्रतिनिधित्व किया था.डेटन शांति समझौते के बाद हॉलब्रुक को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था.इसके बाद ही तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत नियुक्त किया था.
अनुभवी राजनयिक
राष्ट्रपति ओबामा के दूत के रुप में हॉलब्रुक कई बार अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से सीधे भिड़ गए थे.अगस्त, 2009 में अफ़गानिस्तान के विवादास्पद राष्ट्रपति चुनावों के बाद भी हॉलब्रुक ने करज़ई से इस बारे में सीधे सवाल किए थे.हालांकि काबुल स्थित अमरीकी दूतावास की प्रवक्ता ने इस बात का खंडन किया था कि हॉलब्रुक करज़ई पर चिल्लाए थे और बैठक छोड़ कर बीच में ही निकल आए थे.
बाद में अमरीकी जनरल स्टान्ले मैक्क्रिस्टल ने जून महीने में रोलिंग स्टोन पत्रिका में छपे एक लेख में हॉलब्रुक की कड़ी आलोचना की थी.मैक्क्रिस्टल को हॉलब्रुक पर की गई ये टिप्पणियां महंगी पड़ी और उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पडा.हॉलब्रुक अपनी ज़िम्मेदारियों के तहत काफ़ी यात्राएं करते थे. सितंबर में उन्होंने पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया और तालेबान के प्रभाव वाले उत्तर पूर्व के इलाक़ों में भी गए.












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