तेलंगाना पर केंद्र को चेतावनी

तेलंगाना पर केंद्र को चेतावनी
एक साल पहले बयान देकर गृह मंत्री चिदंबरम ने अलग तेलंगाना राज्य का वादा किया था.

तेलंगाना राज्य की मांग करने वाले तमाम संगठनों और दलों ने गुरुवार को केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को चेतावनी दी कि अगर वह अलग तेलंगाना राज्य बनाने के वादे से हटने की कोशिश करेगी तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे.

तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस), भारतीय जनता पार्टी और तेलंगाना प्रजा फ़्रंट सहित कई संगठनों के साथ-साथ तेलुगु देशम के तेलंगाना गुटों ने गुरूवार को अनेक कार्यक्रम आयोजित किए. ये कार्यक्रम गृह मंत्री पी चिदंबरम के उस वक्तव्य के एक साल पूरे होने के मौक़े पर आयोजित किए गए जिसमें उन्होंने घोषणा की थी की केंद्र सरकार अलग तेलंगाना राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरु कर रही है.

टीआरएस ने ये दिन आत्म-सम्मान दिवस के रूप में मनाया और तेलंगाना क्षेत्र के तमाम 10 जिलों में पार्टी ने तेलंगाना के झंडे फहराए और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया कि संसद में तेलंगाना राज्य की स्थापना का विधेयक प्रस्तुत करे.

लेकिन पार्टी के सबसे बड़ा कार्यक्रम 'तेलंगाना महा-गर्जना रैली' का आयोजन नहीं हो पाया. पार्टी ने बारिश और ख़राब मौसम के कारण उसे 16 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है. पार्टी ने वारंगल में होने वाले इस रैली में 25 लाख लोगों को इकठा करके एक बड़ा शक्ति-प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी.

टीआरएस के एक वरिष्ट नेता नरसिम्हा रेड्डी ने बीबीसी से कहा की वो इस रैली द्वारा आंध्र पदेश और केंद में कांग्रेस की सरकारों को संदेश देना चाहते थे की उनके पास तेलंगाना राज्य बनाने के सिवा कोई विकल्प नहीं है. टीआरएस ने मांग की है कि 31 दिसंबर को श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट आते ही वो तेलंगाना राज्य की स्थापना की कार्रवाई शुरु कर दे.

हैदराबाद में विधानसभा के सामने स्थित 'तेलंगाना शहीद समारक' के पास उस समय कुछ तनाव उत्पन्न हो गया जब टीआरएस कार्यकर्ता और तेलुगु देशम के विधायक और उनके समर्थक एक साथ वहां जमा हो गए. जहाँ टीआरएस के लोग तेलंगाना के 'शहीदों' के लिए नारे लगा रहे थे वहीं तेलुगु देशम के कार्यकर्ता चंद्रबाबू नायडू के पक्ष में नारे लगा रहे थे.

भारतीय जनता पार्टी ने इस आंदोलन को दिल्ली में केंद्र सरकार के दरवाज़े तक ले जाने की कोशिश की. आंध्र प्रदेश से भाजपा नेता वेंकैया नायडू, बंडारू दत्तात्रेय, विद्यासागर राव और किशन रेड्डी ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्या और संसद में बिल लाने की मांग की.

दूसरे तमाम दलों की तुलना में सत्ताधारी कांग्रेस के लोग पीछे दिखे और उनका कार्यक्रम केवल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के जन्म दिन का समारोह मानते हुए उनसे अनुरोध करना था कि वो तेलंगाना राज्य की मांग जल्द पूरी करें.

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