अमेरिका चीन को घातक और आक्रामक प्रतिद्वंदी समझता है: विकिलीक्स

विकीलीक्स की ओर से जारी ताज़ा कूटनीतिक दस्तावेज़ों के अनुसार अमरीका चीन को एक अनैतिक, आर्थिक नज़रिए से घातक और आक्रामक प्रतिद्वंदी के रुप में देखता है. ब्रिटेन के समाचार पत्र गार्डियन में छपे इन दस्तावेज़ों से अफ्रीकी देशों को लेकर चीन की विदेश नीति पर अमरीका की दो टूक और बेबाक राय ज़ाहिर होती है.
अफ्रीकी देशों पर अमरीका के सलाहाकार जॉनी कार्सन ने चीन की इस रणनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चीन इस क्षेत्र में समाज सेवा के लिए नहीं बल्कि अपने हित सुरक्षित करने के लिए पहुंचा है. उन्होंने कहा कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अफ्रीकी देशों के वोट बटोरने और अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अफ्रीका में अपनी पैठ बनाई है.
कार्सन के अनुसार फिलहाल चीन अमरीका के लिए सैन्य सुरक्षा के लिहाज़ से ख़तरा नहीं है लेकिन जिस तरह वो अफ्रीकी देशों में अपना जाल फैला रहा है वो अमरीका लिए एक मुसीबत साबित हो सकता है.
उन्होंने कहा, '' क्या चीन ने इन इलाकों में सामरिक समझौते किए हैं. क्या चीन यहां एक ख़ुफ़िया तंत्र चला रहा है, क्या वो यहां सेनाओं को प्रशिक्षण दे रहा है? जब इन सवालों के जवाब मिलने शुरु होंगे तब अमरीका के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी.''
बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस ने इन दस्तावेज़ों की जांच के बाद कहा है कि अमरीका के इन दस्तावेज़ों के अनुसार अफ्रीका पश्चिमी देशों और चीन के निजी हितों की युद्ध भूमि बन गया है. चीन केवल अपने हित सुरक्षित करने के लिए इस क्षेत्र में अपनी पैठ बना रहा है और अमरीका चीन की इस बढ़ती ताकत से परेशान है.
केन्या से संबंधित एक अन्य दस्तावेज़ में कहा गया है कि चीन तेज़ी से केन्या में अपना प्रभुत्व जमा रहा है और विकास के नाम पर शुरु की गई परियोजनाओं के लिए उसने बड़े पैमाने पर रिश्वत दी. दस्तावेज़ों के अनुसार चीन ने केन्या की सरकार को खुफ़िया और सैन्य मदद भी दी है.












Click it and Unblock the Notifications