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आतंकवाद और स्थाई सदस्यता के मुद्दे पर फ्रांस भारत के साथ : सरकोजी

मुम्बई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत के स्थाई सदस्यता के दावे के लिए समर्थन दोहराते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने मंगलवार को यहां कहा कि नई दिल्ली को अपनी जिम्मेदारी का प्रदर्शन करने के साथ ही विश्व में शांति बनाए रखने की पहल के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके पहले सरकोजी ने मुम्बई हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए वह भारत के साथ हैं।टावर होटल और होटल ताज महल पैलेस में 'टूगेदर टू बिल्ड ए सस्टेनेबल फ्यूचर' विषय पर भारत फ्रांस आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरकोजी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में यदि भारत को स्थाई सदस्यता मिल जाती है तो उसे विश्व भर में शांति पहलों के लिए अपनी सेना भेजने के लिए तैयार रहना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, "भारत के एक अरब लोगों की आवाज नहीं सुनी जा रही है। यहां तक कि अफ्रीका के एक अरब लोगों की आवाजों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती। यही कारण है कि हमने यूएनएससी में भारत की स्थाई सदस्यता का हमेशा समर्थन किया है। विश्व में शांति की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर भारत को अपनी सेना भेजने के लिए तैयार रहना चाहिए।"उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि ऐसा करना कठिन काम है क्योंकि अक्सर इस तरह के अभियानों में हमारे लोगों को जान से हाथ धोना पड़ता है, लेकिन विश्व में आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए इस तरह के अभियानों को टाला नहीं जा सकता।"

उधर, ओबेरॉय-ट्राइडेंट होटल में मुम्बई हमले में मारे गए लोगों के लिए आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में सरकोजी ने कहा, "मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हम मुम्बई पर हुए आतंकी हमले को कभी नहीं भूलेंगे और भारत के साथ खड़े रहेंगे, ताकि इस मामले में न्याय हो सके।"
सरकोजी ने कहा, "पाकिस्तान के लोग आतंकवाद की जो कीमत चुका रहे हैं, हमें उसके बारे में पता है, लेकिन दुनिया को यह स्वीकार्य नहीं है कि आतंकी हमले पाकिस्तान से संचालित किए जाएं या आतंकियों को पाकिस्तान में प्रशिक्षित किया जाए।"

सरकोजी ने कहा, "मुम्बई हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद आपराधिक गतिविधि के अलावा और कुछ नहीं है। इसे राजनीतिक या धार्मिक उद्देश्यों की आड़ में अंजाम दिया जाता है, लेकिन यह केवल जंगलीपन है। इसे विचारधारा की लड़ाई बताई जाती है, लेकिन यह उन्हें ही घायल करता है।"सरकोजी ने मुम्बई हमले के बाद संयम बरतने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा, "भारतीय प्रधानमंत्री ने हमले के बाद उल्लेखनीय संयम का परिचय दिया था और वह पाकिस्तान के साथ लगातार बातचीत जारी रखे हुए हैं। फ्रांस इसका समर्थन करता है।"

ज्ञात हो कि पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते से आए आतंकियों ने नवम्बर 2008 में मुम्बई पर हमला किया था और उस हमले में कम से कम 166 लोग मारे गए थे। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी थे। ओबेराय-ट्राइडेंट होटल भी हमले का निशाना बना था।सरकोजी ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान के हालात के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान और वहां स्थित हमारे सैनिकों के लिए यह स्वीकार्य नहीं है कि तालिबान और अलकायदा पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्र में पनाह पाएं।"

सरकोजी ने कहा कि फ्रांस पाकिस्तान के साथ अपने सम्बंधों को महत्व देता है। उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक, स्थिर, और समृद्ध पाकिस्तान इस क्षेत्र और दुनिया के हित में है।"उल्लेखनीय है कि सरकोजी अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा के अंतिम पड़ाव पर मुम्बई में हैं।

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