'अमेरिका की गोपनीयता जानने के लिए चीन ने गूगल को हैक किया था'

समाचार पत्र, 'न्यूयार्क टाइम्स' ने खबर प्रकाशित की है कि 18 मई, 2009 को भेजे गए "गूगल चाइना पेइंग प्राइस फॉर रेसिस्टिंग सेंसरशिप" शीर्षक वाले संदेश में एक उच्च पदस्थ सूत्र के हवाले से कहा गया है कि चीन के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और देश के प्रचार प्रमुख, ली चांगचुन यह जानकर दंग रह गए थे कि गूगल की मुख्य वेबसाइट पर चीनी भाषा में 'सर्च' की व्यवस्था थी।
ली ने और उनके बच्चों ने पहले गूगल पर ऑनलाइन जानकारियां 'सर्च' की और फिर उसके बाद उन्होंने गूगल पर दबाव बनाना शुरू किया। उन्होंने चीन की तीन सरकारी दूरसंचार कम्पनियों को आदेश दिया कि वे गूगल के साथ अपना कारोबार बंद कर दें।
संदेश में कहा गया है कि ली ने यह भी मांग की थी कि गूगल के कार्यकारी अपनी चीनी वेबसाइट और अपनी मुख्य अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट के बीच उपस्थित किसी भी लिंक को समाप्त कर दें। ली ने गूगल के मुख्य अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट को अनधिकृत माना था।
'न्यूयार्क टाइम्स' के अनुसार अमेरिकी राजनयिकों द्वारा भेजे गए उस संदेश में कहा गया था कि चीनी नेतृत्व, सत्ता पर अपनी पकड़ के समक्ष इंटरनेट द्वारा खड़ा किए गए खतरे से लगभग बौखला गया था और वह अपने प्रतिद्वंद्वियों, खासतौर से अमेरिका के बारे में कंप्यूटरों में उपलब्ध गोपनीय बातों को हासिल करने के लिए गूगल को हैक कर इस खतरे को समाप्त करना चाहता था।
'न्यूयार्क टाइम्स' के अनुसार सम्भवत: चीन में शुरू हो रहे हैकिंग (गूगल) के व्यापक अभियान, संदेशों का एक केंद्रीय विषय है। ये अभियान अमेरिकी सरकार और उसके सैन्य आकड़े के व्यापक दायरे पर केंद्रित थे।
इस वर्ष के आरम्भ में भेजे गए एक अन्य संदेश में एक चीनी व्यक्ति और उसके पारिवारिक सम्पर्को के हवाले से कहा गया है कि ली ने खुद अमेरिका में गूगल के सर्वर्स पर हमले का निर्देश दिया था, यद्यपि यह दावा फिलहाल सवालों के घेरे में है।












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