भारतीय पुलिस तंत्र में बदलाव की जरूरत: टोरंटो पुलिस प्रमुख
गुरमुख सिंह
टोरंटो, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। कनाडा में भारतीय मूल के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और टोरंटो पुलिस बोर्ड के अध्यक्ष आलोक मुखर्जी का कहना है कि भारत को अपनी भलाई के लिए जल्द ही अपनी औपनिवेशिक शैली के पुलिस तंत्र को बदलने की जरूरत है।
टोरंटो पुलिस मुख्यालय में मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा कि भारत में पुलिस व्यवस्था राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रभावित है। अब यह खत्म होना चाहिए।
अक्सर सबवे ट्रेन से दफ्तर जाने वाले नम्र और मृदुभाषी मुखर्जी ने कहा, "भारत को पुलिस तंत्र औपनिवेशिक शासकों से विरासत में मिला है जिसमें लोगों को दुश्मन की नजर से देखा जाता है और पुलिस को उस पर नियंत्रण करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन आज के भारत को ऐसे पुलिस तंत्र की जरूरत है जो कि लोगों की सेवा के लिए हो।"
वर्ष 1971 में कनाडा पहुचे 68 वर्षीय मुखर्जी ने कहा कि भारत में पुलिस अधिकारियों से अच्छा व्यवहार किया जाता है लेकिन जो कांस्टेबल वास्तविक पुलिस कार्य करता है उसके साथ नहीं। 'आप कांस्टेबलों को देखिए उनका वेतन बेहद कम है। यह पुलिस तंत्र में भ्रष्टाचार को आमंत्रण देना है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत पुलिस तंत्र के कनाडाई मॉडल को अपनाता है तो उसे इसका फायदा होगा। इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है और कुशल लोगों को अच्छा वेतन मिलता है।
वर्ष 2005 में टोरंटो पुलिस बोर्ड के प्रमुख बने मुखर्जी ने कहा, "मुझे अच्छा लगता है कि भारतीय प्रधानमंत्री और अन्य लोग पुलिस सुधारों की बात करते हैं। जब मेरे पुलिस आयुक्त बिल ब्लेयर और मैनें इस साल की शुरुआत में दिल्ली, मुम्बई और हैदराबाद का दौरा किया था तब उन्होंने कनाडा के पुलिस तंत्र में काफी रुचि दिखाई थी।"
उन्होंने कहा, "भारत में पुलिस जहां राज्य का हथियार है वहीं कनाडा में पुलिस स्थानीय (म्युनिसपल) समुदाय के प्रति जिम्मेदार है। टोरंटो में हम केवल स्थानीय समुदाय की सेवा करते हैं, राजनेताओं की नहीं।"
मुखर्जी के प्रयासों के चलते टोरंटो पुलिस 5,600 पुलिस कर्मिर्यो वाला देश का सबसे बड़ा शहर पुलिस दस्ता बन गई है। उन्होंने पुलिस में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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