इंटीग्रल विवि के वीसी को अलीगढ़ मूवमेन्ट राष्‍ट्रीय पुरस्कार

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नई दिल्ली। अलीगढ़ मूवमेन्ट मैगजीन द्वारा स्थापित प्रथम अलीगढ़ मूवमेन्ट राष्ट्रीय पुरस्कार इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर को कान्स्टीट्यूशन क्लब विटठलभाई पटेल हाउस में एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

इस अवसर पर राज्य सभा के उपाध्यक्ष श्री के. रहमान खान, अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मन्त्री श्री सलमान खुर्षीद, प्रसिद्व सिनेतारिका एवं समाजसेविका नफीसा अली एवं डा. हमीदुल्लाह भट्ट एवं दूसरे षिक्षाविद् उपस्थित थे। इस अवसर पर अल्पसंख्यकों की उच्च षिक्षा- नये आयाम पर एक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।

राराष्‍ट्रीय पुरस्कार को स्वीकार करते हुए प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर ने अपने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के सफर का संक्षिप्त विवरण दिया। उन्होंने कहा कि मिशन इंटीग्रल अभी पूर्ण नहीं हुआ है, अभी हमको बहुत आगे जाना है। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी को दूसरे विश्‍वविद्यालयों की तरह यूजीसी की धारा 12 (बी) के अन्तर्गत पंजीकृत होना चाहिये। ऐसा होने पर हम और भव्य पैमाने पर काम कर सकेंगे एवं जनता के बडे समुदाय की सेवा कर सकेंगें।

राज्य सभा के उपाध्यक्ष श्री के रहमान खान ने इंटीग्रल विश्‍वविद्यालय को पिछले दस सालों का चमत्कार बताया। उन्होंने वहां उपस्थित शिक्षाविदों को इस बात की राय दी कि वह इंटीग्रल विश्‍वविद्यालय जायें और स्वयं अपनी आंखों से इस चमत्कार को देखकर सीख लें। उन्होंने कहा कि हमें पुरानी समस्याओं पर बहस करने के विपरीत अमली तौर पर कार्य करें, जिस तरह प्रो. अख्तर ने करके दिखाया।

मौलाना आजाद के हवाले से श्री रहमान ने आहवान किया कि हमें अपने आपको भारत का दूसरा बडा बहुसंख्यक समुदाय महसूस करें ना कि सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय। योजना आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य सभा के उपाध्यक्ष ने बताया कि आने वालों दस सालों में भारत को पन्द्रह सौ विश्‍वविद्यालयों की आवश्‍यकता होगी। उसके मुकाबले में हमारे पास अभी केवल एक तिहाई विश्‍वविद्यालय भी नहीं हैं। इसका अर्थ यह है कि हमारे पास इंटीग्रल जैसे बहुत से विश्‍वविद्यालय खोलने का अवसर हैं। हमको आगे बढ़कर कुछ अमली कदम उठाना होगा जैसा कि प्रो. वसीम अख्तर ने किया।

अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्षीद ने इंटीग्रल विश्‍वविद्यालय की कामयाबी की सराहना करते हुए उसके वाईस चान्सलर द्वारा किये गये कार्यों को सलाम किया। श्री खुर्षीद ने आहवान किया कि हमें इस तरह की सोच और विचारों का सम्मान करना चाहिए। अपनी बात कहने का ढंग होना चाहिए एवं अपनी बात को इस ढंग में कहना चाहिए कि दूसरे हमारी बात को सही तरह से समझ सकें। हमें अपनी बात को मनवाने के लिये अपनी आवाज में वजन पैदा करना चाहिये।

प्रसिद्व अदाकारा एवं समाजसेविका नफीसा अली ने इस बात पर बल दिया कि उच्च शिक्षा का मसला सुलझाने के लिय हमें अपने बच्चों को प्रारम्भिक शिक्षा देनी होगी। एवं अभिभावकों को भी समझाना होगा कि उनकी समस्यायें शिक्षा से ही पूरी होगी। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि अभिभावक अपने बच्चों विशेषकर लड़कियों को स्कूल भेजें ताकि एक शैक्षिक वातरवरण बने।

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