BJP का दोहरा चरित्र, कहीं नायक कहीं खलनायक
सरकार की 300 करोड़ की भूमि को अपने ऱिश्तेदारों में बांटे जाने का आरोप झेल रहे कर्नाटक के सीएम येदियुरप्पा को अब किसी का डर नहीं रह गया है, वो अपने ही पार्टी के नेताओं की बखिया उधेड़ने में लगे हुए हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण गडकरी के बुलाये जाने पर येदियुरप्पा का ना जाना है। और तो और उन्होने खुले आम अनंत मिश्रा और सुषमा स्वराज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ताजुज्ब की बात ये है कि बीजेपी ही नियमों और आदर्श की दुहाई देती है और वो ही कर्नाटक में सारे नियमों की धज्जियां उड़ा रही है।
कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति का आरोप लगाने वाली भाजपा आखिर क्यों कर्नाटक में भाई-भतीजावाद की राजनीति कर रही है? एक तरफ वो स्पैक्ट्रम घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटाला और कॉमनवेल्थ घोटाले के लिए JPC मांग रही है तो वहीं दूसरी और उसकी सरकार भूमि आवंटन घोटालों में फंसी हुई है, आखिर वो उसके लिए JPC की मांग क्यों नहीं कर रही है, सिर्फ इसलिए क्योंकि इस घोटालों में भाजपा का नाम शामिल है।
समाज के ये ठेकेदार जो जनता के नाम पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकते है उनका मंशय सिर्फ और सिर्फ सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होना है, राजनैतिक और इंसानियत आईने में भाजपा की सूरत इस समय जो दिख रही है उसने उसका इरादा और चरित्र बखूबी उजागर कर दिया है। उसकी छवि से सिर्फ ये पता चल रहा है कि उसकी JPC मांग केवल कांग्रेस सरकार गिराने के लिए है न कि मासूम जनता के साथ किए गए धोखे का बदला लेने के लिए। लेकिन अफसोस जनता के सामने उसका दोहरा चरित्र उजागर हो चुका है। देखना दिलचस्प होगा भाजपा के इस रवैये का अगला कदम क्या होता है? सवाल यहां ये भी उठता है कि आखिर क्यों भाजपा दोहरी राजनीति खेल रही है कहीं वो नायक हैं तो कहीं वो खलनायक क्यों बन गई है ?













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