जी-20 बैठक के लिए मनमोहन आज होंगे रवाना

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में जी -20 देशों की बैठक में शामिल होने के लिए मनमोहन सिंह बुधवार को रवाना होंगे. दुनिया के बदलते आर्थिक परिदृश्य में हो रही जी-20 बैठक में दुनिया भर की अर्थव्यवस्था की समीक्षा होगी और आर्थिक सहयोग के नए आयामों पर बातचीत होगी. दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में 11 नवंबर से जी-20 देशों की बैठक होने वाली है और इसमें भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल होंगे.
कई देशों की ख़राब अर्थव्यवस्था और बदलते आर्थिक परिदृश्य में ये बैठक महत्वपूर्ण हो जाती है. प्रधानमंत्री की यात्रा के बारे में विदेश सचिव निरुपमा राव ने जानकारी देते हुए कहा कि इस बैठक में मूल रुप से दुनिया की आर्थिक व्यवस्था पर चर्चा की जाएगी और ये बात की जाएगी कि किस तरह इस व्यवस्था को और बेहतर किया जा सकेगा.
उनका कहना था, ''प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देशों के नेताओं से तो बात करेंगे ही लेकिन साथ ही द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी. उन्होंने बताया कि कुछ देशों के साथ बैठकें तय हैं लेकिन इसके अलावा भी प्रधानमंत्री वरिष्ठ नेताओं से द्विपक्षीय मुलाक़ातें करेंगे.""
यह पूछे जाने पर कि क्या चीनी युआन के मुद्दे पर बातचीत होगी तो विदेश सचिव का ये कहना था, ''कुछ समय पहले जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में ये तय किया गया था कि युआन हो या कोई भी मुद्रा हो उसकी दरें बाज़ार के हिसाब से तय की जाएं और संभवत जी 20 में इसी बात को आगे बढ़ाया जाएगा.'"
युआन के मुद्दे पर अमरीका चीन तनाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये दो देशों के बीच का मामला है लेकिन हम कोशिश करेंगे कि मुद्राओं की दरें बाज़ार के हिसाब से तय हों. भारत इस बैठक में कोशिश करेगा कि आर्थिक विकास का एजेंडा बदले और इसमें आपसी हितों को ध्यान में रखा जाए. इस बैठक में भारत ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था की वकालत करेगा जिसमें उसकी अधिक से अधिक बातें मानी जाएं. आपसी हितों की रक्षा हो सके ताकि जिस तरह की मंदी का सामना अमरीका को करना पडा है वैसी स्थिति दोबारा न बने.
यही वजह है कि जी-20 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख भी हिस्सा ले रहे हैं और इन वित्तीय संस्थानों में बदलाव पर भी ज़रुर चर्चा होगी. उन्होंने कहा कि बैठक में उन उपायों पर चर्चा होगी जिससे बाज़ारों को स्थिर रखा जा सके. मुद्रा के मुद्दे पर संघर्ष न हो और एक ऐसी व्यवस्था बने जिसमें विकास केंद्र में रहे. इस बैठक में प्रधानमंत्री ब्रिटेन, कनाडा, इथियोपिया, ब्राज़ील के नेताओं से मिलेंगे. इसके अलावा भी और देशों के नेताओं से मिलेंगे लेकिन ये बैठकें अभी तय नहीं हुई हैं.












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