हवाई सेवा कंपनियों पर अरबों का जुर्माना

इन कंपनियों में ब्रिटिश एअरवेज़, एअर फ्रांस और जापान एअरलाइंस शामिल हैं. बीबीसी संवाददाता मार्क ग्रेगरी के अनुसार यूरोपीय आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि दुनिया की जानीमानी कुछ कंपनियों ने साल 2001 से लेकर 2006 के बीच ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मालभाड़ा तय कर डाला. यूरोपीय आयोग का कहना है कि यदि जांच करने वालों ने हस्तक्षेप न किया होता तो ये गोरखधंधा अभी और आगे तक चलता रहता.
यहां तक कि इन हवाई कंपनियों ने ईंधन की बढ़ती क़ीमतों को क़िराया बढ़ाकर बराबर करने की कोशिश की. इस मामले में सबसे ख़राब रिक़ॉर्ड रहा एअर फ्रांस का. इसीलिए उस पर 35 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया है. जबकि ब्रिटिश एअरवेज़ पर 20 करोड़ डॉलर का जुर्माना तय किया गया है. ब्रुसेल्स में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यूरोपीय प्रतिस्पर्धा आयोग के आयोक्त जोआक़िन अल्मुनिया ने कहा कि इन कंपनियों का ये कृत्य बेहद निंदनीय है और अगर इन्होंने जांच में सहयोग न किया होता तो जुर्माने की रक़म कहीं और ज़्यादा होती.
जोआक़िन अल्मुनिया ने बताया कि चूंकि मूल्य निर्धारित करने वालों ने ज़्यादातर काम फ़ोन के ज़रिए किए इसलिए लोगों से सीधी सूचनाएं मिलने में परेशानी हुई. और बिना इसके गड़बड़ी को साबित करना बेहद मुश्किल था. कई कंपनियों को अमरीकी अधिकारियों को पहले ही 1.6 अरब डॉलर की राशि जुर्माने के तहत अदा करनी है. इस मामले की जांच अमरीकी न्याय विभाग कर रहा है.












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