गारद सलामी के साथ निकली महाकाल की सवारी
वर्षो से चली आ रही परंपरा के मुताबिक महाकाल की सावन मास के अलावा कार्तिक मास के सभी सोमवार को सवारी निकलती है। मान्यता है कि महाकाल सवारी के जरिए अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं क्योंकि महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। इसी परंपरा के चलते कार्तिक मास के पहले सोमवार को सवारी निकली।
महाकाल की सवारी को पुलिस जवानों की टुकड़ी ने सलामी दी और सवारी नगर भ्रमण पर निकल पड़ी। सवारी में श्रद्घालु नाचते गाते और जयकारे लगाते चल रहे थे। वहीं जगह-जगह स्वागत कर पालकी पर पुष्प वर्षा की गई।
सवारी क्षिप्रा नदी के तट पर पहुंची जहां पूजा अर्चना के बाद नगर भ्रमण करती हुई वापस अपने दरबार में पहुंची।
इंडो-एशियन न्यूज सíवस।












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