पिता के साए से महरूम बचपन की कसक से वाकिफ हैं ओबामा

रीता कपूर

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा उन बच्चों की पीड़ा को बखूबी समझते हैं जिनका बचपन पिता के साए के बिना गुजरता है। उनका मानना है कि ऐसे बच्चों के गरीबी और अपराध में लिप्त होने की संभावना पांच गुना अधिक, पढ़ाई अधूरी छोड़ने की संभावना नौ गुना अधिक और अंत में जेल में पहुंचने की संभावना 20 गुना अधिक होती है। ऐसे बच्चों की कसक स्वयं ओबामा ने अपनी पुस्तक 'चेंज वी कैन बिलीव इन' में कही है।

इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद 'नई राहें और नये इरादे' शीर्षक से प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इसके 'फादर्स डे, वर्ष 2008' अध्याय में ओबामा लिखते हैं, "मैं जानता हूं कि पिता की अनुपस्थित का अर्थ क्या होता है, यद्यपि मेरी परिस्थितियां इतनी कठोर नहीं थीं जितनी आज के कई युवाओं की है। मैं जब दो वर्ष का था, मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए थे और मैं उन्हें केवल उनके लिखे पत्रों और उन कहानियों के जरिए जानता था, जो मेरे परिवार ने मुझे सुनाई थी।"

ओबामा ने लिखा है, "इस मामले में मैं अधिकांश बच्चों से अधिक सौभाग्यशाली था। मैं हवाई में पला-बढ़ा और मुझे कंसास के नामा-नानी का भरपूर प्यार मिला, जिन्होंने मुझे और मेरी बहन के पालन-पोषणा में मेरी मां की मदद करने के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया- जिन्होंने मां के साथ मिलकर हमें प्यार, आदर और एक दूसरे के प्रति जितनी मुझे करनी चाहिए थीं, परंतु मुझे कई बार दूसरे मौके मिले। हमारे पास यद्यपि बहुत ज्यादा धन नहीं था।"

ओबामा का कहना है, "छात्रवृत्तियों ने मुझे अमेरिका के सर्वोत्तम स्कूलों में से कुछ में पढ़ने का अवसर दिया। आज के बहुत-से बच्चों को इतने अवसर नहीं मिले। उनके जीवन में गलतियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं होती। इस प्रकार, उस दृष्टि से मेरी अपनी कहानी कुछ अलग है।"

अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा है, "फिर भी, मैं जानता हूं कि मेरी मां को एक एकल अभिभावक होने की कितनी कीमत चुकानी पड़ी। कभी-कभी उन्हें बिल चुकाने, हमें वे चीजें दिलाने जो दूसरे बच्चों के पास होती थीं, उन सभी भूमिकाओं को निभाने, में उन्हें कितना संघर्ष करना पड़ता था। यह भूमिका माता और पिता दोनों को मिलकर निभानी चाहिए थी। मैं जानता हूं कि इस बात ने मुझे कितनी क्षति पहुंचाई। इसलिए, कई वर्ष पहले मैंने संकल्प लिया कि इस सिलसिले को खत्म करना मेरा दायित्व होगा कि यदि मैं जीवन में कुछ भी बन सका तो मैं अपनी बेटियों के लिए एक अच्छा पिता बनूंगा। यदि मैं उन्हें कुछ भी दे सका, मैं उन्हें वह चट्टान - वह बुनियाद दूंगा जिस पर वे अपना जीवन निर्माण कर सकें। और वही उन्हें मेरा सर्वोत्तम उपहार होगा।"

पुस्तक में ओबामा की स्वीकारोक्ति है, "यह कहते हुए मुझे इस बात का भी एहसास है कि मैं एक अपरिपूर्ण पिता रहा हूं - यह जानते हुए कि मैंने गलतियां की हैं और आगे भी करता रहूंगा, मैं आशा करता हूं कि मैं अपनी बेटियों और पत्नी को घर पर अधिक समय दे सकूंगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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