ओबामा के भारत दौरे से बदलेगी तस्वीर!
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भारत के परमाणु दायित्व विधेयक को लेकर अमेरिकी उद्योग जगत की चिंता जता चुका है। दूसरी ओर आउटसोर्सिग और उच्च श्रेणी की रक्षा तकनीक के निर्यात पर अमेरिकी नियंत्रण पर भारत कई बार अपनी नाखुशी जाहिर कर चुका है। अब अमेरिकी सरकार की ओर से इस बात का स्पष्ट संकेत दिया गया है कि उसने भारत के साथ इन मसलों पर अहम प्रगति की है। सामरिक संचार मामलों के उप सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया, "हम भारत को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी अपने महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखते हैं।"
उन्होंने कहा, "एशिया में अमेरिकी निर्यात और मजबूत साझेदारी को विस्तार देने की हमारी 'व्यापक एशियाई नीति' की बुनियाद भारत है। अमेरिकी विदेश नीति का प्रमुख लक्ष्य भारत-अमेरिका संबंध को नई ऊंचाई तक ले जाना है।" संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के भारत के दावे से जुड़े सवाल को रोड्स ने संयुक्त राष्ट्र सुधार से जोड़ा। उन्होंने कहा, "सैद्घांतिक तौर पर हम भारत की आवाज को बड़े पर पैमाने उठते देखना चाहते हैं।"
अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मामलों के उप सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्रोमैन ने कहा कि उनका मुल्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के तेजी से उभरने और उसकी अहम भूमिका होने का पूरा समर्थन करता है। यह पूछे जाने पर कि ओबामा के भारत दौरे पर कश्मीर का मसला उठेगा तो रोड्स ने कहा कि यह मुद्दा क्षेत्रीय मसलों पर होने वाली चर्चा में संदर्भ के रूप में लिया जा सकता है। इसके साथ उन्होंने कहा कि यह भारत और पाकिस्तान के जिम्मे है कि वे बातचीत के जरिए समस्याएं हल करें।
पाकिस्तानी मूल के दहशतगर्द डेविड कोलमैन हेडली के बारे में अमेरिका द्वारा भारत के साथ जानकारियां साझा न करने की बात पर रोड्स ने कहा कि अगर उनके देश के पास इस बारे में कोई जानकारी रही होगी तो उसे भारत को जरूर मुहैया कराया गया होगा। उधर, अमेरिका में खुफिया विभाग के प्रमुख ने हेडली मामले की पूरी समीक्षा करने और सभी जानकारियां भारत के साझा करने का आदेश दिया है।













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