अजमेर धमाका मामले में चार्जशीट दाख़िल

बीबीसी संवाददाता, जयपुर
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 2007 मे हुए धमाके में तीन लोग मारे गए थे जबकि 20 घायल हुए थे. राजस्थान पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह में हुए धमाका के मामले में कथित रूप से एक हिन्दू संगठन से जुड़े तीन लोगो के विरुद्ध शुक्रवार को अदालत में चार्जशीट दाख़िल किया.
चार्जशीट में भूमिगत चल रहे स्वामी असीमानंद नाम के एक व्यक्ति को इस हादसे का सूत्रधार बताया गया है जिसने अपने गुजरात स्थित आश्रम में इसकी व्युह रची. सूफ़ी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्टूबर, 2007 को बम धमाके हुए थे जिसमें तीन लोग मारे गए थे जबकि बीस से ज़्यादा घायल हुए थे. 800 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने घटना की तफसील के साथ हादसे के लिए कथित तौर पर ज़िम्मेदार लोगों का विवरण दिया है.
दाख़िल कागज़ात में जिन छह लोगों का ज़िक्र बतौर अभियुक्त किया गया है उनमें से तीन - देवेंदर गुप्ता, चंद्रशेखर और लोकेश हिरासत में है जबकि संदीप डांगे और रामजी कलसांगरे को फ़रार बताया गया है. मध्य प्रदेश में एक हिन्दू संगठन के कार्यकर्त्ता रहे सुनील जोशी का ज़िक्र भी एक अभियुक्त के रूप में किया गया है मगर जोशी की बहुत पहले कथित रूप से हत्या कर दी गई थी.
अभियोजन ने गवाहों के तौर पर 132 लोगों की सूची और कई दस्तावेज़ पेश किए है. पुलिस ने कुछ हिन्दू संगठनों का जिक्र किया है जिसमें अभिनव भारत और उससे जुड़े लोगों का भी उल्लेख है. कहा गया है कि इस पुरी जाँच के दौरान एक मोबाइल फ़ोन के सिमकार्ड ने बड़ी मदद की जो विस्फोट में नष्ट नहीं हुआ था. बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि वह क़ानूनी लड़ाई जारी रखेंगें क्योंकि जिन लोगो को गिरफ़्तार किया गया है उन्हें झूठा फंसाया गया है.












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