'कार्रवाई नहीं करना चाहती पाक सेना'

बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान में अमरीका विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं
अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे उत्तर वज़ीरिस्तान में सक्रिय चरमपंथियों से निपटने के लिए पाकिस्तान की इच्छा और क्षमता पर अमरीका ने आशंका जताई है.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने अपने एक आकलन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति की भी आलोचना की है और कहा है कि उनकी लोकप्रियता घट रही है.
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान में एक अमरीकी हमले में पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की घटना पर अमरीका को सार्वजनिक रुप से माफ़ी माँगनी पड़ी है.
इस घटना के विरोध में पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के लिए ईंधन लेकर जा रहे टैंकरों को जलाने की कई घटनाएँ हो चुकी हैं.
अफ़ग़ानिस्तान युद्ध पर व्हाइट हाउस के ताज़ा आकलन में कहा गया है कि कई वजहों से पाकिस्तानी सेना अपनी सीमा में तालिबान और अल-क़ायदा के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करना चाहती.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह राजनीतिक पसंदगी का भी सवाल भी है और यह भी कि सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही सेना चुन रही है कि वह क्या कर सकती है और क्या नहीं.
ज़रदारी की भी निंदा
पाकिस्तान में पिछले दिनों नेटो के तेल टैंकरों को जलाने की कई घटनाएँ हुई हैं
वहाँ आई बाढ़ ने भी अधिकारियों के लिए एक नई परेशानी खड़ी की है.
लेकिन व्हाइट हाउस के आकलन में जो तस्वीर खींची गई है, उसके अनुसार सेना मुख्य सड़कों पर रहती है और वहीं वह चरमपंथियों को हटाती रहती है लेकिन इसके आगे वह कोई कार्रवाई नहीं करती.
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में आई बाढ़ के समय में यूरोप की यात्रा करने के लिए राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की निंदा की है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह से ज़रदारी की छवि देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़राब हुई है और इसी की वजह से पार्टी के भीतर तनाव बढ़ा है और असैन्य और सैन्य ताक़तों के बीच की खाई बढ़ी है.
अमरीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की असैनिक सरकार पर लोगों का भरोसा तेज़ी से घटा है लेकिन सेना पर लोगों का विश्वास बढ़ा है.












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