आर्थिक क्षेत्र में चीन को पछाड़ सकता है भारत

India
वाशिंगटन। चीन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ने के लिए भारत को भले ही अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना हो लेकिन अपनी युवा शक्ति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के चलते भारत जल्द ही तेज विकास दर हासिल कर सकता है। जी हां भारतीय युवा अपने देश को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रतिष्ठित पत्रिका 'द इकोनोमिस्ट' ने राष्ट्रमंडल खेल और मीडिया में इसके खराब कवरेज के संदर्भ में अपनी कवर स्टोरी में लिखा, "भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चीन से ज्यादा अमीर होने के लिए भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है। चीन की अर्थव्यवस्था भारत से चार गुना बड़ी है लेकिन भारत की विकास दर वर्ष 2013 तक चीन की विकास दर से ज्यादा हो सकती है।"

देखें: राष्‍ट्रमंडल खेल 2010 विशेष पृष्‍ठ

"कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत अगले 25 वर्षो तक अन्य बड़े देशों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से विकास करेगा। कुल 1.2 अरब लोगों के देश की तेज विकास दर काफी उत्साहित करने वाली रहेगी। यह चीन की विकास दर को पीछे छोड़ देगी।"

पत्रिका के मुताबिक, डरावने टायलेट, डेंगू के मच्छरों की भनभनाहट, गिरती हुई छतें, ढीली सुरक्षा और एक आतंकी हमला भी भारत को खेलों के आयोजन से रोक नहीं सके। पत्रिका ने कहा कि भारत वैश्विक शक्ति केंद्र के रूप में दूसरे स्थान पर रह सकता है। पत्रिका ने कहा, "भारत में युवा और काम करने में सक्षम लोगों की बड़ी संख्या उपलब्ध है। यहां निर्भर लोगों (बच्चे और बुजुर्ग) की संख्या दुनिया में सबसे कम है, जो कि लंबे समय तक कम ही बनी रहेगी।"

पत्रिका ने कहा, "एक मजबूत केंद्र सरकार तुलनात्मक रूप से कम अस्त-व्यस्त राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन कर सकती थी लेकिन बैडमिंटन और जिम्नास्टिक के अलावा जीवन में और भी बहुत कुछ है। भारत की सरकार कमजोर है लेकिन इसकी निजी कम्पनियां काफी मजबूत हैं।"

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