प्रियदर्शिनी हत्याकांड : कार्यकर्ताओं ने कहा, हस्तक्षेप करे सीबीआई

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रहे कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दोषी की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में तब्दील किए जाने पर आक्रोश जताया और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से समीक्षा याचिका दायर करने को कहा।

इस मामले में न्याय के लिए 2006 से चलाए जा रहे अभियान का नेतृत्व करने वाले आदित्य राज कौल ने कहा, "हम निराश हैं। उच्च न्यायालय ने फैसला देने से पहले सभी तथ्यों पर गौर किया था, मसलन संतोष सिंह प्रियदर्शिनी के पीछे पड़ा हुआ था, उसने उसके साथ छेड़खानी की, उसके बाद निर्दयतापूर्वक बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। हमारी समझ से उच्च न्यायालय के फैलले को बरकरार रखा जाना चाहिए।"

कौल ने आईएएनएस से कहा, "दोषी को मृत्युदंड की सजा दिलाने के लिए सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करे। यदि यह संभव नहीं है तो मट्टू परिवार को कानूनी सलाह लेनी होगी।"

एक छात्र कार्यकर्ता शर्मिला सिंह ने कहा कि फैसले से उन्हें धक्का पहुंचा है।

उन्होंने कहा, "मुझे धक्का पहुंचा है और काफी निराशा हुई है। सर्वोच्च न्यायालय मृत्युदंड की सजा को कैसे कम कर सकता है? "

इस मामले में न्याय के लिए रैली निकालने वाले और मामले पर करीबी नजर रखने वाले छात्र हरीश साल्वे ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि प्रियदर्शिनी के परिवार को न्याय जरूर मिलेगा। जरूरत पड़ी तो न्याय की मांग को लेकर हम फिर सड़कों पर उतरेंगे।"

उल्लेखनीय है कि संतोष ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अपनी कनिष्ठ प्रियदर्शिनी मट्टू की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। 23 जनवरी, 1996 को मट्ट का शव उसके एक रिश्तेदार के वसंत कुंज स्थित एक फ्लैट से बरामद किया गया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने दिसम्बर 1999 में संतोष को सजा से मुक्त कर दिया था। लेकिन अक्टूबर, 2006 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने संतोष को मौत की सजा सुनाई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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