'दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए कानून बने'
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यदि कोई महिला किसी व्यक्ति के साथ कुछ दिन तक रह कर उससे दूर हो जाती है तो उसे मुआवजा देने के लिए गुजारे भत्ते की तर्ज पर कोई एक व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मरक डेय काटजू और न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर की पीठ ने कहा, "हमें अमेरिकी प्रांत कैलीफोर्निया की तरह क्यों नहीं दूसरी पत्नी के लिए गुजारे भत्ते हेतु एक कानून विकसित करना चाहिए, क्योंकि वह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत गुजारे भत्ते के लिए दावा नहीं कर सकती।"
अदालत ने अधिवक्ता जयंत भूषण को अदालत को मदद देने के लिए अदालती सहयोगी के रूप में नियुक्त किया।
बिना विवाह के साथ रहने वाली महिला के लिए मुआवजे की व्यवस्था कैलीफोर्निया के सर्वोच्च न्यायालय ने 1977 में मार्विन बनाम मार्विन के मामले में किया था। मिशेल ट्रिओला मार्विन ने अभिनेता ली मार्विन पर मुकदमा किया था।
यद्यपि मिशेल मुकदमा नहीं जीत पाई थीं, लेकिन उनके वकील ने इसके लिए एक नया शब्द 'पालीमोनी' गढ़ दिया। इसके लिए उसने प्रचलित शब्द 'एलिमोनी' में 'पाल' को जोड़ दिया।
मिशेल मार्विन ने दावा किया था कि 1971 में उसने अभिनेता ली मार्विन के साथ रहना शुरू किया था। ली पहले से शादीशुदा थे। मिशेल ने दावा किया था कि ली ने उसे आजीवन सहारा देने का वादा किया था।
मिशेल इसलिए मुकदमा हार गई, क्योंकि वह अपने बीच हुए करार को साबित नहीं कर पाई थी। लेकिन तभी से पालीमोनी का सिद्धांत विकसित हो गया है।
'एलीमोनी' शादीशुदा जोड़े के बीच तलाक के बाद पत्नी को गुजारे-भत्ते की व्यवस्था करता है तो 'पालीमोनी' बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़े के अलग होने पर महिला के गुजारे भत्ते की व्यवस्था करता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को याची डी.वेलुसामी की खिंचाई की जिसने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पत्नी की व्याख्या की आड़ में अपनी दूसरी पत्नी डी.पचैम्माल को किसी भी तरह का मुआवजा देने से इंकार कर दिया।
न्यायमूर्ति काटजू ने कहा, "पिछले 14 सालों तक आपने उसके साथ का आनंद लिया और अब आप मुआवजा देने से भागना चाहते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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