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खेल गांव से खुश हैं विदेशी पत्रकार

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेल गांव में किए गए इंतजाम को देखते हुए विदेशी पत्रकारों ने अच्छी प्रतिक्रिया दी है, हालांकि कुछ को सुविधाओं के अभाव के चलते शिकायत भी है। अधिकतर पत्रकार भारतीय मीडिया की नाकारात्मक र्पिोटिग को लेकर अचम्भित हैं।

ब्रिसबेन के समाचार पत्र 'संडे मेल' के सह संपादक माइक कोलमैन ने आईएएनएस को बताया, "हमने देखा है कि किसी भी बड़े खेल आयोजन के शुरू होने से पहले पत्रकार उसकी नकारात्मक कवरेज करते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि पत्रकारों को खेल के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती हैं। लिहाजा वह उसके अन्य पहलुओं पर देखना शुरू कर देते हैं।"

उन्होंने कहा, "फिलहाल भारत में जो हो रहा है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। सामान्य तौर पर घरेलू मीडिया आयोजनों को लेकर इस तरह से मुखर नहीं होता है, लेकिन भारतीय पत्रकारों के मामले में यह अलग है। भारतीय पत्रकारों ने राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी केवल नाकारात्मक खबरों को तरजीह दी। उन्होंने सिर्फ विवादास्पद पहलुओं पर ध्यान दिया।" कोलमैन ने खेल गांव में इंतजाम को लेकर संतोष जताया है।

सह संपादक ने कहा, "मैं वर्ष 1992 से ओलम्पिक और राष्ट्रमंडल खेलों की र्पिोटिंग कर रहा हूं। यहां का इंतजाम संतोषजनक हैं। मैं समझता हूं कि इस तरह के बड़े आयोजन के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है।"

बीबीसी के मैथ्यू केंयोन ने कहा, "खेल गांव में किए गए इंतजाम और यहां के माहौल से मैं बेहद अभिभूत हूं। हालांकि मैंने अभी अन्य आयोजन स्थलों का दौरा नहीं किया है, लेकिन अभी तक का मेरा अनुभव बेहतर रहा है।"

उन्होंने कहा, "हां यह जरूर है कि भारतीय मीडिया ने इसे लेकर नाकारात्मक कवरेज की है। लेकिन हमें तब तक ऐसे र्पिोटिग पर विश्वास करना चाहिए, जब तक हम खुद नहीं देख ले।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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