दिल्ली में राजस्थानी कला की झलक

जयपुर, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों के 80 वर्ष के इतिहास में पहली बार भारत में हो रहे 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान राजस्थान की कला एवं संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।

नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रविवार को होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के मुख्य उद्घाटन समारोह में राजस्थान की कालबेलिया नृत्यांगनाएं अपने परम्परागत 'सपेरा नृत्य' की दिलकश प्रस्तुति देंगी।

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दिल्ली को सजाने संवारने के लिए लगभग हर प्रमुख मार्ग एवं चौराहे पर राजस्थान का गुलाबी रंग का पत्थर लगाया गया है। इसी प्रकार राजस्थान के इमारती पत्थर से चमकते दमकते अक्षरधाम मंदिर के पास बनाए गए खेलगांव में राजस्थानी ग्रेनाइट पत्थर का बड़ी मात्रा में उपयोग किया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में स्थित लगभग सभी ऐतिहासिक स्थल एवं इमारतें राजस्थानी पत्थर से ही निर्मित हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रमंडल खेलों में दिल्ली की खूबसूरती बढ़ाने के लिए राजस्थानी पत्थर का उपयोग होने से विश्वस्तर पर 'राजस्थानी स्टोन' को एक बार फिर से नई पहचान मिली है।

जालोर के ग्रेनाइट उद्यमी बजरंग सिंह देवड़ा कहते हैं, "जालोर के ग्रेनाइट की मार्केटिंग में हमेशा कमी रही। राष्ट्रमंडल खेलों में ग्रेनाइट का उपयोग होने से विश्व स्तर पर जालोर की पहचान कायम होगी। यह ग्रेनाइट उद्योग के लिए बहुत अच्छा संकेत है।"

जालोर के ही ग्रेनाइट उद्यमी गोपाल जोशी कहते हैं कि कई रंगों में उपलब्ध जालोर के ग्रेनाइट का बड़ी मात्रा में खेल गांव में उपयोग किया गया है। इससे यहां के बाजार में भी तेजी आई है। इससे ग्रेनाइट उद्योग का और विकास होगा।

नई दिल्ली में हाल ही में शुरू किए गये मेट्रो रेल स्टेशनों पर भी राजस्थानी कला की बहुरंगी चमक देखी जा सकती है।

केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सौजन्य से दिल्ली के आईएनए सहित विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर देश की विविध कलाओं के साथ ही राजस्थानी कलाकारों द्वारा निर्मित टेराकोटा टाइल्स की कलाकृतियां, फड पेटिंग, मुरल सांझी आर्ट, कोटा किशनगढ़ एवं मेवाड़ स्कूल आदि पेटिंग्स के साथ ही लोक कला (फॉक) एम्ब्रॉयडरी, ब्लॉक प्रिटिंग, टाई एवं डाई पर आधारित पेंटिग्स लगाई गई है।

इनमें राजस्थान के मोलेला कलाकार मोहन लाल चतुर्भुज, फड कलाकार श्रीलाल जोशी, कोटा चित्रकला शैली के बाबूलाल मरोटिया, किशनगढ़ शैली के नंद किशोर वर्मा, बौद्ध शैली के हरि नारायण मरोटिया, मेवाड़ चित्रशैली के कलाकार जयप्रकाश, थ्रेड एम्ब्रॉयडरी कलाकार दौलतराम खाम्बु, ब्लॉक प्रिटिंग एवं टाई-डाई कलाकार हाजी बादशाह मियां की कृतियों को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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