बाबरी विध्वंस आपराधिक मामला रहेगा: चिदंबरम

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि अयोध्या मामले पर गुरुवार को आए फ़ैसले से बाबरी मस्जिद विध्वंस के मसले पर कोई फ़र्क पड़ने वाला है. दिल्ली में पत्रकारों से हुई चर्चा में उन्होंने कहा, "बाबरी मस्जिद का विध्वंस एक आपराधिक मामला था और आपराधिक मामला रहेगा."
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ के बहुमत के आधार पर दिए गए फ़ैसले में कहा गया है कि जिस स्थान पर भगवान राम की प्रतिमा है वहाँ प्रतिमा रहेगी और वह स्थान रामलला गुट के पास रहेगा.
इस रिपोर्ट के बाद मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस फ़ैसले से छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने का मामला कमज़ोर पड़ जाएगा क्योंकि अदालत ने यह मान लिया है कि जहाँ बाबरी मस्जिद थी उसे रामजन्मभूमि मान लिया गया है.
लेकिन एक सवाल के जवाब में पी चिदंबरम ने कहा, "इस फ़ैसले का उस घटना से कोई लेना देना नहीं है जो छह दिसंबर, 1992 को घटी थी." उन्होंने लिबराहन आयोग की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए कहा, "बाबरी मस्जिद का ढहाया जाना एकदम अस्वीकार्य है क्योंकि वह कुछ ऐसे लोगों का कार्य था जिन्होंने क़ानून को अपने हाथों में ले लिया था. मेरी राय में वह अब भी एक आपराधिक मामला है."
पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि गुरुवार का फ़ैसला लिखने वाले जजों के हवाले से यह कहना ठीक नहीं होगा कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराए जाने को न्यायोचित ठहराया है." छह दिसंबर, 1992 को हिंदू कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था
यह पूछे जाने पर कि समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि गुरुवार को आए फ़ैसले से मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहे हैं, पी चिदंबरम ने कहा कि अदालत का फ़ैसला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है लेकिन यह फ़ैसला अभी लागू नहीं किया जा रहा है. प्रधानमंत्री के बयान के हवाले से उन्होंने कहा कि अभी अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी.
उनका कहना था कि जैसा कि अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है, इस फ़ैसले को चुनौती देने का अधिकार स्वाभाविक रुप से सभी को है इसलिए अगले कुछ दिनों या हफ़्तों में सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाएँ आएँगीं और फिर इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट कोई अंतरिम आदेश जारी करते मामले की सुनवाई करेगा.
उनका कहना था, "चूंकि इस फ़ैसले पर अभी अमल नहीं हो रहा है इसलिए इस पर फ़िलहाल टिप्पणी करने की कोई आवश्यकता नहीं है और वहाँ यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी." गुरुवार के फ़ैसले पर पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मीडिया इस फ़ैसले का ज़रुरत से ज़्यादा विश्लेषण कर रहा है.
उन्होंने मीडिया को सलाह दी,"अगले तीन महीने तक यदि टेलीविज़न इस फ़ैसले को कम समय देंगे और अख़बार इसे कम स्थान देंगे तो सहायता मिलेगी." उनका कहना था कि अब मीडिया को राष्ट्रमंडल खेलों आदि पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए.












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