अयोध्या फैसला : लखनऊ बेंच के तीनों न्यायाधीशों पर एक नजर
न्यायाधीश धर्म वीर शर्मा - 62 साल के सबसे अनुभवी न्यायाधीश हैं। न्यायाधीश शर्मा अपने निष्पक्ष निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। न्यायाधीश शर्मा 1 अक्टूबर को सेवानिवृत होने वाले हैं। सेवानिवृति से पहले वह एक ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा बनने जा रहे हैं। शर्मा जी ने बुलंदशहर के एक कॉलेज से वर्ष 1970 में कानून की डिग्री ली। वर्ष 1972 में उन्होने न्यायिक सेवा की परीक्षा पास कर जिला जल की कुर्सी संभाली।
वर्ष 1989 से अक्टूबर 1991 तक वह उत्तर प्रदेश के कानपुर में उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन के चीफ लॉ ऑफीसर रहे। इसके बाद उन्होने जुलाई 2001 तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लीगल ज्वाइंट सेक्रेटरी की पद संभाला। वर्ष 2002 में उन्हे जिला और सेशन जज के रूप में पदोन्नति मिली। साल 2005 में वह उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच का हिस्सा बने।
न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल - लखनऊ बेंच के सबसे कम उम्र के सदस्य न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल 52 साल के हैं। सुधीर अग्रवाल का अंग्रेजी प्रेम पूरी अदालत में विख्यात है। वे पिछले 3 साल से इस बेंच में हैं। इससे पहले वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के बार से बाहैसियत वकील 25 साल तक जुड़े रहे हैं।
जस्टिस अग्रवाल आगरा यूनिवर्सिटी से साइंस ग्रेजुएट हैं। उन्होने वर्ष 1980 में मेरठ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होने उसी साल इलाहाबाद हाई कोर्ट बार को अक्यूहर महीने में ज्वाइन कर लिया। उन्होने एक टैक्स एडवोकेट के रूप में अपना करियर शुरू किया और बाद में सर्विस लॉज में शिफ्ट हो गए।
साल 2003 में उन्हे एडिशनल एडवोकेट जनरल के रूप में नियुक्त किया गया। इ लाहाबाद हाई कोर्ट बेंच में उन्होने वर्ष 2005 अक्टूबर में ज्वाइन किया। इसके बाद अगस्त 2007 में वह स्थाई जज के रूप में नियुक्त कर दिए गए। वे अदालत में अपने कानूनी ज्ञान के लिए जाने जाते हैं।
न्यायाधीश सिबघट उल्लाह खान - लखनऊ स्पेशल बेंच के तीसरे सदस्य उल्लाह खान अपनी तीक्ष्ण हाजिरजवाबी और स्मार्ट एटीट्यूड के लिए जाने जाते हैं। न्यायाधीश उल्लाह खान के पास इतिहास और कानून की गहरी समझ है। वे 58 वर्ष के हैं। उन्होने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। साल 2002 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थाई न्ययाधीश बनने से पहले उन्होने सिविल, रेवेन्यू और सर्विस के क्षेत्र में 25 साल तक कानूनी विशेषज्ञता हासिल की है।
उल्लाह खान अपने मुद्दों को ज्यादातर कोर्ट के बाहर सुलह करवाने के लिए मशहूर हैं। उन्होने अब तक 2000 से भी अधिक मामलों में बात-चीत के आधार पर दोनों पक्षों में सुलह करवाई है।
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