प्रधानमंत्री से मिलना चाहते हैं फ़ेनेल

बीबीसी से बात करते हुए खेल फ़ेडरेशन के मुख्य कार्यकारी माइक हूपर ने ये जानकारी दी और कहा कि फ़ेनेल गुरूवार को भारत पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि ये आने का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था लेकिन अब फ़ेनेल ने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए वक्त मांगा है. फ़ेनेल ने खेल की तैयारियों पर काफ़ी असंतुष्टि ज़ाहिर की है और कैबिनेट सचिव तक को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है.
उधर कॉमनवेल्थ खेलों की सुरक्षा और तैयारियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा है कि अगर इस बार खेल नहीं हुए तो ये हमेशा के लिए कॉमनवेल्थ खेलों के भविष्य पर संकट पैदा कर देगा. उन्होंने कहा, ''अगर दिल्ली में खेल नहीं हो पाते हैं तो इससे कॉमनवेल्थ खेलों का भविष्य ही संकट में आ जाएगा. यह किसी भी किसी भी कीमत पर सही नहीं होगा.''
प्रधानमंत्री की का मानना है कि कॉमनवेल्थ खेलों के सुरक्षा इंतज़ामों में निकली ख़ामियाँ दुनिया भर के लिए परेशानी की सबसे बड़ी वजह हैं.उधर ऑस्ट्रेलियाई खेल मंत्री मार्क आर्बिब का कहना है कि खेलों में शामिल होने या नहीं होने का फ़ैसला एथलीट्स का निजी फ़ैसला होगा. वहीं राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अध्यक्ष माइकल फ़ैनेल तैयारियों की समीक्षा के लिए गुरुवार को दिल्ली पहुँच रहे हैं.
'राष्ट्रमंडल खेल की सुरक्षा में सेंध'
ग़ौरतलब है कि एक ऑस्ट्रेलियाई टीवी न्यूज़ चैनल 7-न्यूज़ ने दिल्ली में तीन अक्तूबर से शुरू हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा में सेंध लगाने का दावा किया है. टीवी चैनल 7-न्यूज़ की टीम का दावा है कि उसका एक पत्रकार विस्फोटक लेकर बिना किसी रोक-टोक राष्ट्रमंडल खेल के एक स्टेडियम में घुस गया. इस पूरे घटनाक्रम पर चैनल ने वीडियो बनाया है.
इस बीच न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के खिलाड़ियो ने गेम्स विलेज में फैली गंदगी और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के चलते कॉमनवेल्थ खेलों से नाम वापस ले लिया है. ऑस्ट्रेलिया की 'डिस्कस थ्रो" की खिलाड़ी डैनी सैमुअल्स ने दिल्ली में अपनी 'सुरक्षा और सेहत के प्रति चिंता" के कारण कॉमनवेल्थ खेलों से नाम वापस ले लिया. सैमुअल्स डिस्कस थ्रो में विश्व चैंपियन हैं.
इस फ़ैसले के सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई खेल मंत्री आर्बिब ने कहा, "डैनी के लिए ये फ़ैसला काफ़ी मुश्किल रहा होगा मगर मैं उसका सम्मान करता हूँ. खेलों में हिस्सा लेने या नहीं लेने के लिए नहीं कह सकती." नाम वापस लेने वालों में ब्रिटेन के कई बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं.
राष्ट्रमंडल खेलों पर संकट के बादल
खेलों की बदइंतज़ामी को लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन ने भारत की कड़ी आलोचना की है. फ़ैनेल ने कहा कि गेम्स विलेज का मुआयना करने गई टीम ये देख कर हैरान है कि खिलाड़ियों के रहने की जगह बेहद गंदी है और निर्माण अधूरा है. भारत में आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट ने इन ख़बरों के बाद कहा कि भारत और पश्चिमी देशों के सफ़ाई के मानदंड अलग-अलग हैं. भनोट के इस बयान की भी कड़ी आलोचना हुई.
भरोसे को लगी चोट
राष्ट्रमंडल खेलों में इंग्लैंड के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख क्रेग हंटर का कहना था, "ये बात तो समझ में आती है कि अलग-अलग देशों में सफ़ाई के मानदंड अलग हैं मगर किसी भी खेल गाँव में सफ़ाई का एक न्यूनतम स्तर होता है और यहाँ का खेल गाँव उस न्यूनतम स्तर पर खरा नहीं उतरता."
इस बीच कॉमनवेल्थ खेलों से हटने के सवाल पर प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा है कि न्यूज़ीलैंड की ओलंपिक समिति इस बारे में दूसरे देशों से बातचीत करेगी और उस आधार पर कोई फ़ैसला लेगी. उनके अनुसार भारत तेज़ी से विकसित हो रहा है और ऐसे में खेलों को टालने का फैसला भारत की छवि को नुकसान पहुँचाएगा.












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