उत्तराखण्ड में बाढ़ व भूस्खलन से मृतकों की संख्या 71 पहुंची
आपदा प्रबंधन सचिव डा. राकेश कुमार ने जानकारी दी है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को मिलकार बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटना में मरने वालों की संख्या बढकर 67 हो गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रशद आपूर्ति एवं दुरदराज में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए चार हेलीकाप्टरों को कार्य पर लगाया है।
वहीं हरिद्वार जिले में गंगा में बह कर आए तीन अज्ञात शव पुलिस को मिले हैं। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय गुंज्याल ने बताया कि बिकमपुर चौकी के पास तीन अज्ञात शव बरामद हुए हैं। यह शव पहाड़ से गंगा के पानी में बह कर आए लगते हैं। इनकी शिनाख्त के लिए पहाड़ में सूचना कर दी गई है। इन शवों में एक पुरुष, एक स्त्री और एक लड़का है।
उधर रानीखेत में भी बादल फटने की घटना हुई है। लेकिन इसमें किसी भी प्रकार के जानमाल व नुकसान की खबर नहीं है। अल्मोड़ा के उप पुलिस अधीक्षक सी.डी. पंत ने बताया कि सोमवार को रानीखेत में एक जगह बादल फटने की घटना हुई थी। किन्तु उसमें किसी भी तरह के जान माल की कोई क्षति नहीं पहुंची है।
दूसरी ओर उत्तरकाशी के चिन्यालीसोड के नजदीक बडेथी गांव में जमीन धंसने से इस गांव के नागरिक दहशत में है। बडेथी गांव में मंगलवार को हुई जमीन धसने की घटना में छह भवन ढह गए।
एसडीएम भटवारी एस. एस. सेमवाल का कहना है कि बडेथी गांव में अचानक हुआ भूधंसाव चिंताजनक है उन्होंने बताया कि प्रभावितों को सुरक्षित जगह रहने की व्यवस्था कराई जाएगी और तहसीलदार को उन्होंने मामले की पूरी जानकारी के आदेश दिए हैं।
मंगलवार को धूप निकलने पर बडेथी में अचानक जमीन धंसने लगी जिसके कारण दर्जनों घरों में पांच से दस इंच मोटी दरारें उभर आईं। इससे गंगोत्री राजमार्ग के बाधित होने के आसार हैं। दहशत के कारण गांव के लोग घरों को छोड़ रहे हैं। हालांकि राज्य मौसम केन्द्र के निदेशक डा. आनंद कुमार शर्मा का कहना है कि अचानक तापमान में वृद्घि होने के कारण जमीन धंसने, पहाड़ खिसकने और हिमखंड पिघलकर टूटने के आसार रहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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