कश्मीर संकट एएफएसपीए से संबंधित नहीं : राजू (लीड-1)
राजू ने कहा कि सेना को अनावश्यक जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। राज्य का संकट लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा है न कि उस कानून से जो सेना को आतंकवाद से लड़ने का पूरा अधिकार देता है।
राजू ने मंगलवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "आतंकवाद से लड़ाई में सेना को पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए एएफएसपीए एक आवश्यक तत्व है। जो सुरक्षा कर्मी इतने कठिन काम को अंजाम दे रहे हैं, उन्हें तो आपको किसी तरह का सुरक्षा कवच देना ही होगा।"
राजू ने कहा कि जो कानून सशस्त्र सेना को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, वह किसी खतरे से निपटने के लिए उनके लिए जरूरी है।
यह पूछे जाने पर कि कश्मीर के जिन हिस्सों में आतंकी हिंसा में कमी आई, क्या वहां से इस कानून को हटाया जा सकता है, राजू ने कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि आतंकियों को एक इलाके से दूसरे इलाके में पहुंचने में और वहां अशांति फैलाने में बहुत कम समय लगता है।
उन्होंने कहा, "कश्मीर में अभी भी स्थिति सामान्य नहीं है। ऐसे में एएफएसपीए में न तो किसी तरह का संशोधन हो सकता है और न ही इसे कुछ इलाकों से हटाया जा सकता है।"
राजू ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि राज्य में अशांति भड़काने वाले तत्व अभी भी सक्रिय हैं।
राजू ने कहा कि एएफएसपीए को हल्का करने या हटाए जाने का मुद्दा उठा कर जम्मू एवं कश्मीर में सेना को दोषी ठहराया जा रहा है और उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
राजू ने जोर देकर कहा, "कश्मीर की मौजूदा स्थिति के लिए सेना जिम्मेदार नहीं है.. मेरा आकलन यह है कि बड़ी चुनौती राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की है। इसे केंद्र और राज्य स्तर पर अच्छे शासन के जरिए ही पूरा किया जा सकता है। जम्मू एवं कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल किए जाने का लक्ष्य होना चाहिए और सेना की उपस्थिति इस उद्देश्य में मदद ही कर रही है।"
ज्ञात हो कि कश्मीर में जारी हिंसा के बीच वहां के नेता और अलगावादी एएफएसपीए को हटाने की मांग कर रहे हैं। घाटी में 11 जून से जारी हिंसा में 103 लोगों की मौत हो चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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