उत्तर भारत बाढ़ की चपेट में, बिहार के नए गांव जलमग्न
दिल्ली | दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं जबकि उत्तराखण्ड में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में बाढ़ से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले में गंगा से तीन शव बरामद किए गए हैं। बिहार में कुछ और नए गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। उत्तराखण्ड के बांधों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने और भारी बारिश के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सात जिलों के करीब 150 गांवों में रामगंगा और कोसी का पानी प्रवेश कर गया है। क्षेत्र में सड़क और रेल यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
उत्तराखंड के कालागढ़, नंद सागर, भमगोड़ा बांध से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर और फरुखाबाद जिलों में रामगंगा और कोसी नदी उफान पर हैं। बिजनौर के अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने बताया कि जिले के तीन तहसीलों के करीब 40 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। अफजलगढ़ गांव में एक व्यक्ति की बाढ़ से मौत हो गई।
सिंह के मुताबिक धामपुर के पास रामगंगा नदी पर बने हरवेली बैराज का एक हिस्सा तेज बहाव के कारण टूट गया जिस कारण पास के गांवों में पानी घुस गया। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पिछले दो दिन से अफजलगढ़ के पास पानी में डूबा हुआ है।
मुरादाबाद जिले के मूढ़ापांडे में कोसी के उफान पर आने से नई दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-24 भी गत दो दिनों से जलमग्न है। वाहनों को रामपुर होकर दिल्ली भेजा जा रहा है।
उधर उत्तराखंड स्थित बनबसा बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा और शारदा का जलस्तर 20 सेंटीमीटर बढ़ गया है। बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी व बस्ती जिले पहले से घाघरा और शारदा का कहर झ्झेल रहे हैं। यहां बाढ़ से करीब 350 से ज्यादा गांवों की तीन लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने इन जिलों में बाढ़ से 20 लोगों की मौत की पुष्टि की है।
उत्तराखण्ड के हरिद्वार में बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है। गंगा का पानी अब बरेली की ओर बढ़ गया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय गुजाल ने कहा कि तीन लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गंगा से तीन शवों को बरामद किया गया है। प्रभावित इलाकों में खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले में कोई व्यक्ति लापता नहीं है इसलिए गंगा में बरामद तीन शव पहाड़ी जिलों के हो सकते हैं। उधर ऋषिकेश में गंगा तट पर बने परमार्थ आश्रम की शिव प्रतिमा के बाढ़ में बह जाने की सूचना है।
इधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना में पानी बढ़ने के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। यमुना पर बने पुराने पुल को मंगलवार को बंद कर गया। हरियाणा से 7.44 लाख क्यूसेक जल छोड़े जाने के बाद यमुना का जलस्तर मंगलवार सुबह बढ़कर 206.16 हो गया है जो खतरे के निशान से 1.33 मीटर ऊपर है। केन्द्रीय जल आयोग के मुताबिक बुधवार को जलस्तर 207 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है जो खतरे के निशान से 2.17 मीटर ऊपर होगा। कश्मीरी गेट पर स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने कहा, "मंगलवार सुबह जलस्तर 206 मीटर से ऊपर चला गया इस कारण हमें ओल्ड रेलवे पुल को बंद करना पड़ा।"
पुल के बंद होने से दिल्ली और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है और उससे निकलने वाली सड़कों पर जाम की स्थिति है। राजधानी के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति है और न्यू उस्मानपुर, सरिता विहार, कालिंदी कुंज, जामिया नगर और वजीराबाद जैसे इलाकों को खाली कराकर वहां के लोगों को अस्थाई शिविरों में भेजा गया है।
बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी पर बने बचाव बांध के टूट जाने के बाद नदी का पानी और कई नये गांवों में प्रवेश कर गया है। बाढ़ का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग 28 तथा बरौली-सीवान मार्ग के पर बह रहा है जिस कारण इन दोनों मागरें पर आवागमन ठप्प हो गया है। सिधवलिया प्रखंड के खजुरिया गांव में पानी फैल जाने के कारण इस प्रखंड में दहशत व्याप्त हो गया है तथा लोगों का पलायन प्रारंभ हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार बाढ़ के पानी के कारण अब तक करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। गोपालगंज के जिलाधिकारी बाला मुरूगन डी ने मंगलवार को बताया कि बरौली प्रखंड में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित लेागों को बरौली में बने पांच राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक 600 परिवारों को राहत शिविर में पहुंचाया गया है।
हालांकि उन्होंने बताया कि कई परिवार घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं जिस कारण बचाव दल को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। इस बीच पिछले 32 सालों का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद हरियाणा में यमुना नदी में पानी कम हो गया है।
यमुनानगर जिले के हथनिकुंड बैराज से मंगलवार को यमुना में केवल 140,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। राजस्व अधिकारियों ने यहां जानकारी दी कि यमुनानगर और करनाल जिलों के निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का पानी कम होने लगा है। हथिनिकुंड बैराज से सोमवार को यमुना में सबसे ज्यादा 744,507 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। पिछले 32 सालों में पहली बार इतना अधिक जल यमुना में छोड़ा गया। इससे पहले तीन सितम्बर, 1978 को यमुना में 709,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
राज्य सरकार ने करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया है और इन जिलों के उप आयुक्तों को भी स्थिति से निबटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। हरियाणा के वित्त आयुक्त और प्रधान सचिव (राजस्व) नरेश गुलाटी ने कहा, "यमुना के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते यमुनानगर जिले के कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। प्रभावित इलाकों में इससे निपटने के उपाय किए जा रहे हैं।"












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