कश्मीर में महिला की मौत, मृतकों की संख्या 102 हुई (राउंडअप)

श्रीनगर, 19 सितम्बर (आईएएनएस)। उत्तरी कश्मीर के सोपोर कस्बे में रविवार को एक उग्र भीड़ पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में एक 25 वर्षीय महिला की मौत हो गई। जबकि सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में घायल हुए प्रदर्शनकारियों में से तीन ने रविवार को दम तोड़ दिया। इसके साथ ही घाटी में 11 जून से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या बढ़ कर 102 हो गई है।

पुलिस ने कहा कि महिला की पहचान मुबीना के रूप में की गई है। पुलिस ने यहां कहा, "सोपोर कस्बे के नाथीपोरा बोमई में दिन की तैनाती के बाद सुरक्षा बलों को हटाए जाने के समय एक भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव के दौरान नाथीपोरा निवासी गुलाम अहमद वानी की बेटी मुबीना घायल हो गई।"

पुलिस ने कहा, "विशेष इलाज के लिए उसे श्रीनगर ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसने दम तोड़ दिया।" पुलिस ने कहा कि इस घटना में कुछ सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए।

इस बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि टप्पर गांव में शुक्रवार को सुरक्षा बलों के साथ झड़प में घायल हुए युवक मुहम्मद अमीन गनाई की मौत हो गई।

अधिकारी ने कहा कि श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज सूरा (एसकेआईएमएस) में रविवार को बिलाल अहमद नजर और शब्बीर अहमद डार की मौत हो गई। बिलाल शनिवार को अनंतनाग जिल के खन्नल इलाके में हुई झड़प में घायल हुआ था जबकि डार गुरुवार को अवंतीपारो इलाके में जख्मी हुआ था।

प्रशासन ने श्रीनगर और घाटी के अन्य बड़े कस्बों में कर्फ्यू जारी रखा है ताकि हिंसा को रोका जा सके। शनिवार को श्रीनगर में कर्फ्यू में चार घंटे की छूट दी गई थी।

घाटी में बीते 11 जून से हिंसा का दौर शुरू हुआ था। 12 सितंबर से अब तक की हिंसा में ही 18 लोगों की जान जा चुकी है।

दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल घाटी के हालात का जायजा लेने सोमवार को कश्मीर पहुंच रहा है।

इसके मद्देनजर मुख्यधारा के तथा अलगवादी विचारधारा के कई सारे नेताओं को, व्यापार एवं उद्योग प्रतिनिधियों को तथा स्थानीय समाज के अन्य प्रमुख घटकों को हिंसा के वर्तमान दुष्चक्र के समाधान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लिखित निमंत्रण भेजा गया है।

कट्टरपंथी नेता सैयद अली गिलानी पहले ही कह चुके हैं कि वह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे। जबकि आजादी समर्थक जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष यासीन मलिक और नरमपंथी हुर्रियत समूह के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा है कि वे औपचारिक निमंत्रण प्राप्त होने के बाद ही तय करेंगे कि उन्हें सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलना है या नहीं।

मुख्य विपक्षी, पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि यदि सरकार ने सोमवार को भी घाटी में कर्फ्यू जारी रखा तो वह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने के अपने निर्णय पर फिर से विचार कर सकती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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