इंडियन मुजाहिदीन की राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हिंसा की धमकी (लीड-2)
इस प्रतिबंधित संगठन की ओर से जारी एक बयान में जामा मस्जिद गोलीबारी का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन कश्मीर घाटी में नागरिकों की हत्या की निंदा की गई है और तीन अक्टूबर से यहां शुरू हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों को निशाना बनाने का संकल्प लिया गया है।
बीबीसी हिंदी सेवा को भेजे गए ईमेल में कहा गया है, "एक तरफ मुसलमानों का खून पानी की तरह बहाया जा रहा है, दूसरी ओर तुम खेल समारोह की तैयारी कर रहे हो। हम तुम्हें राष्ट्रमंडल खेलों के खिलाफ चेतावनी देते हैं।"
बयान में कश्मीर घाटी के बारे में ज्यादा बात की गई है। जहां 11 जून से शुरू हुई हिंसा के बाद से 100 से अधिक लोग मारे गए हैं।
बयान में कहा गया है, "कश्मीर में मुसलमानों की जिंदगी साग-पात से भी सस्ती हो गई है। इस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आपराधिक चुप्पी कश्मीरी मुसलमानों पर ढाए जा रहे जुल्म से ज्यादा खतरनाक है।"
बयान में कहा गया है, "हमें पता है कि खेलों की तैयारियां जोरों पर हैं। यह भी जान लीजिए कि हम भी अपनी तैयारियां जोर-शोर से कर रहे हैं।"
बयान में कहा गया है, "खेलों में हिस्सा लेने वाले लोग हमारे हमलों के परिणामों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे, क्योंकि हमारे मुजाहिदीन जीवन से अधिक मौत से प्यार करते हैं।"
बयान में कहा गया है, "हम आपको चेतावनी देते हैं कि अगर आप में हिम्मत हो तो राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन करके दिखाएं।"
यह मेल बीबीसी को दोपहर 1.40 बजे मिला था। जिस पते से यह मेल भेजा गया था, वह है: अल डॉट अरबी999123 एट जीमेल डॉट कॉम।
लगभग पांच पन्नों के इस मेल में कश्मीर में सुरक्षा बलों की कथित ज्यादतियों का जिक्र किया गया है।
इस पत्र में आतिफ अमीन और मुहम्मद साजिद को शहीद करार दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने बाटला हाउस मुठभेड़ में इन दोनों को मारने का दावा किया था। पत्र में इन दोनों की मौत का बदला लेने की बात भी कही गई है।
पत्र में मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया का भी जिक्र है। कहा गया है, "बेकसूर मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर ईमानदार अधिकारी बनने का भ्रम साफ कर दिया जाएगा।"
पत्र में बार-बार कुरान की आयतें लिखी गई हैं। अंत में पूरे मुस्लिम समुदाय से हिंदुओं के खिलाफ बगावत करने की अपील की गई है।
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त करनैल सिंह से जब इस मेल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, "हमें ईमेल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन हम गोलीबारी की घटना की पूरी जांच कर रहे हैं।"
माना जाता है कि इंडियन मुजाहिदी प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का एक छद्म संगठन हैं और इसके संबंध पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से भी हैं।
यह संगठन उस समय सुर्खियों में आया था, जब 23 फरवरी, 2005 को वाराणसी में विस्फोट हुआ था। इस पर सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों का भी आरोप है, जिसमें दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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