जगमग्न हुए कई इलाके, उत्तराखण्ड में अब तक 63 मरे (राउंडअप)
देहरादून में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने बताया कि टिहरी बांध में जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। बाढ़ पूर्वानुमान निगरानी निदेशालय के अधिकारी बी. डी. रॉय ने आईएएनएस को बताया, "उत्तराखण्ड के टिहरी बांध में जलस्तर खतरे के निशान के 230 मीटर तक जा पुहंचा है। इसकी वजह से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।"
टिहरी बांध विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया, "अगर जलस्तर 235 मीटर तक पहुंच गया तो हालात खतरनाक हो जाएंगे। हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई नुकसान न हो।"
बांध में अगर पानी का स्तर और बढ़ता है तो आस-पास के गांवों और हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों और नजदीकी इलाकों के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण उस इलाके में पहले ही खराब स्थिति है। टिहरी झील के आसपास के 72 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और कई सरकारी इमारतों को खाली कराया जा सकता है।
इधर, भारी बारिश और उत्तराखण्ड से पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। रामगंगा और कोसी के उफान से बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, फरुखाबाद और रामपुर के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ से सड़क यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर रेलमार्ग के डूबने का खतरा मंडरा रहा है।
पिछले 24 घंटों के दौरान इन जिलों में करीब 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। साथ ही उत्तराखण्ड स्थित कालागढ़, हरिद्वार बांध व भमगोड़ा बांध से पानी भी छोड़ा गया है।
बिजनौर के अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने बताया, "कालागढ़ बांध से पानी छोड़े जाने के कारण रामगंगा उफान पर है और धामपुर के पास हरवेली बैराज का एक हिस्सा तेज बहाव से टूट जाने के कारण पास के करीब 20 गांव जलमग्न हो गए हैं।"
हरिद्वार बांध से पानी छोड़े जाने के कारण चांदपुर तहसील में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है और पानी आस-पास के चार गावों में प्रवेश कर गया है।
उन्होंने बताया कि नेहतौर के पास दिल्ली-हरिद्वार एनएच-74 के पानी में डूबने से मार्ग बंद है। वाहनों को काशीपुर के रास्ते हरिद्वार भेजा जा रहा है। उधर रामगंगा का पानी मुरादाबाद कोसी नदी में जाकर मिलने से कोसी भी उफान पर है, जिससे वहां हालात बिगड़ गए हैं।
मुरादाबाद के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि मूढ़ापांडे के पास दिल्ली-लखनऊ एनएच 24 अभी भी कोसी नदी के पानी में डूबा हुआ है, जिससे यातायात फिलहाल बाधित है। वाहनों को बिलारी कस्बे से रामपुर होते हुए दिल्ली भेजा रहा है।
रामपुर, बरेली, अमरोहा, शाहजहांपुर और फरुखाबाद में भी रामगंगा व कोसी उफान पर हैं। सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मुरादाबाद और आस-पास के जिलों में बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण किया।
तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी व बस्ती जिले पहले से घाघरा और शारदा नदियों का कहर झेल रहे हैं। यहां बाढ़ से करीब 300 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए है और करीब तीन लाख से ज्यादा आबादी बेघर होकर सड़क पर आ गई है। उत्तराखंड स्थित बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा और शारदा ने फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है।
बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी पर बने बचाव बांध के टूट जाने से यहां के करीब 50 गावों में पानी घुस गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर बचाव व राहत कार्यो में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इस बीच राहत कर्मियों ने पानी में फंसे 32 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
गोपालगंज के बरौली प्रखंड के सेमरिया गांव के पास रविवार को बचाव बांध टूट जाने के कारण सेमरिया, सोनबरसा, सलोना, मिर्जापुर ग्राम पंचायतों में पानी घुस गया। बाढ़ का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर मिर्जापुर के पास करीब तीन से चार फुट ऊपर बह रहा है जिस कारण इस मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने सोमवार को बताया कि अब तक करीब 50 गांवों में 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई है।
दिल्ली में बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। हरियाणा के हथिनि कुंड बैराज से सात लाख क्यूसेक से अधिक पानी यमुना नदी में छोड़े जाने के बाद दिल्ली में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दिल्ली में यमुना का जलस्तर 205.83 मीटर तक पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 0.65 मीटर ऊपर है। हथिनि कुंड से 7.44 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जो बुधवार को दिल्ली पहुंच सकता है।
हरियाणा में यमुना का जलस्तर सोमवार को भी खतरे के निशान से ऊपर बना रहा। इसकी वजह से किनारे के गांवों में एक बार फिर से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि करनाल, पानीपत और फरीदाबाद जैसे जिलों में फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हथिनीकुंड बैराज से रविवार को यमुना में करीब सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस मौसम में इस बैराज से यमुना में छोड़े गए पानी की यह सर्वाधिक मात्रा है। राज्य सरकार ने करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में बाढ़ की ताजा चेतावनी जारी की है और उनके उपायुक्तों को ऐहतियाती कदम उठाने को कहा गया है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से पोंग बांध में सोमवार को पानी बहाव तेज हो गया हालांकि अधिाकरियों का कहना है कि चिंता कोई बात नहीं है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के के.सी. राणा ने आईएएनएस को बताया, "सोमवार सुबह पोंग बांध में जल का बहाव बढ़ बया। रविवार को इसमें 8,000 क्यूसेक पानी का बहाव था जो बढ़कर 18,000 क्यूसेक हो गया है।"
पोंग बांध में सोमवार सुबह जलस्तर 1,393.14 फुट था हालांकि इसकी क्षमता 1,395 फुट की है। बीबीएमबी का कहना है कि वह निरंतर स्थिति पर नजर रखे हुए है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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