उपेक्षित पड़ा है सलमान रुश्दी का पैतृक घर
सोलन (हिमाचल प्रदेश), 20 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय मूल के ब्रिटिश उपन्यासकार सलमान रुश्दी के पैतृक घर पर समय की मार दिखने लगी है। उपेक्षित पड़े इस घर में बचपन में कभी रुश्दी ने गर्मियों की कई छुट्टियां बिताई थीं।
वर्ष 1927 में बने इस घर को एकदम पहाड़ी घरों जैसी शक्ल दी गई थी और इसमें धुआं उगलने वाली चिमनियां भी लगी हुई थीं। अब इस एक मंजिला घर की छतों में दरारें विकसित हो गई हैं जिनसे होकर बारिश का पानी कमरों तक पहुंच रहा है। पिछले 13 सालों से छह शयनकक्षों वाले इस बंगले 'अनीस विला' में ताला पड़ा है और यहां की दीवारें फफूंदी से ढक गई हैं।
वैसे तो इस घर की छत में चार साल पहले से ही रिसाव होने लगा था लेकिन मानसून में यह स्थिति और भी बदतर हो जाती है।
इस घर की देख-रेख करने वाले गोविंद राम ने आईएएनएस को बताया, "छत में छिद्र बन गए हैं और हाल की बारिश में उनकी स्थिति और भी खराब हो गई है। पानी रिसने और सीलन के कारण अंदर की दीवारों के ज्यादातर हिस्से पर फफूंद के काले धब्बे विकसित हो गए हैं। घर में लकड़ी का जो काम हुआ है उसमें भी सीलन है।"
उन्होंने कहा कि ज्यादातर समय कमरे बंद रहते हैं और वहां ताजी हवा भी नहीं आती है इस वजह से वहां सड़न पैदा हो रही है।
करीब एक दशक से भी लंबे समय से इस घर की देख-रेख कर रहे राम ने कहा, "वर्ष 1997 में जब से साहिब (रुश्दी) को इस घर का मालिकाना हक मिला है तब से वह सिर्फ एक बार ही यहां आए हैं। उनके वकील (विजय टी. शंकरदार) उनकी संपत्ति की देख-रेख करते हैं। हम उन्हें छतों से रिसाव के विषय में पहले ही सूचित कर चुके हैं।"
रुश्दी अंतिम बार अपने बेटे जफर के साथ 14 अप्रैल, 2000 को कुछ घंटों के लिए अपने पैतृक घर में आए थे।
वर्ष 1927 में सलमान रुश्दी के दादा मोहम्मद उल्दीन ने तीन बीघा क्षेत्र में फैसे रुश्दी एस्टेट को खरीदा था।
जब रुश्दी परिवार पाकिस्तान जाकर बस गया तो सरकार ने इसे शरणार्थी सम्पत्ति घोषित कर दिया और इसे राजस्व विभाग को सौंप दिया था।
सलमान रुश्दी के पिता मौलवी अनीस अहमद ने 1969 में अपने बेटे को यह घर उपहार में दिया। इसके बाद रुश्दी ने 1992 में इस पर दावा किया। नवम्बर 1997 में उप आयुक्त श्रीकांत बाल्डी ने यह सम्पत्ति रुश्दी को लौटा दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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