आईएमएफ में बढ़ सकते हैं, भारत के अधिकार

नई दिल्ली। सियोल में नवंबर में प्रस्तावित जी-20 सम्मेलन में इस बार 66 साल पुराने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पुनर्गठन और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार का मुद्दा प्राथमिकता में रह सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों की प्रभुसत्ता वाले आईएमएफ की स्थापना 1944 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मौद्रिक सहयोग बढ़ाने और विनिमय दरों में स्थिरता लाने के लिए की गई थी।

जी 20 की अध्यक्षीय समिति के महासचिव चांगयोंग ने भारत दौरे के समय कहा, "मुझे उम्मीद है कि नवंबर में होने जा रहे सियोल सम्मेलन में आईएमएफ में सुधार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। इस संस्था में बदलते विश्व के स्वरूप का अक्स दिखाई देना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "अमेरिका का मतभार 17 प्रतिशत है इससे 85 प्रतिशत से अधिक मतदान की अनिवार्यता वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर उसे वीटो अधिकार मिल जाता है। 24 सदस्यीय बोर्ड में यूरोपीय देशों के लिए भी नौ स्थान सुरक्षित हैं। इसलिए इस संरचना को आज वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।"

उन्होने कहा, "इस संरचना में बदलाव की जरूरत है। भारत और चीन जैसे विकासशील देशों की आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका है।" प्रमुख 20 विकसित और विकासशील देशों के राष्ट्राध्यक्ष 11 नवंबर और 12 नवंबर को सियोल में इस सम्मेलन में शामिल होंगे। जी-20 का यह पांचवां सम्मेलन है। इससे पहले यह सम्मेलन वाशिंगटन, लंदन, पिट्सबर्ग और टोरंटो में आयोजित हो चुका है।

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