कनिष्क विमान हादसा : रैयत के खिलाफ सुनवाई पूरी
वेंकूवर, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। एयर इंडिया के कनिष्क विमान हादसे की सुनवाई के दौरान शपथ लेकर झूठ बोलने के आरोपी इंदरजीत सिंह रैयत के खिलाफ जूरी की सुनवाई यहां गुरुवार को पूरी हो गई।
दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह पूरी होने के बाद अदालत ने अब रैयत के खिलाफ उपलब्ध सबूतों पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।
कनिष्क विमान हादसे के लिए सिर्फ रैयत को ही अब तक दोषी ठहराया जा सका है। 15 वर्षो तक जेल में रहने के बाद रिहा हुआ था।
कनाडा के शहर मांट्रियल से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाले कनिष्क विमान में सवार सभी 329 लोगों के लिए 23 जून, 1985 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ।
इनमें से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडियाई नागरिक थे। इसी दिन टोक्यो में एयर इंडिया के एक अन्य विमान को निशाना बनाने के लिए ले जाया जा रहा बम हवाई अड्डे पर ही फट गया था जिसमें दो लोग मारे गए थे।
रैयत पेशे से मैकेनिक था और उसने स्वीकार किया था कि टोक्यो की वारदात को उसने ही अंजाम दिया था। इस मामले में वर्ष 1991 में उसे 10 साल की सजा हुई। इसके बाद कनिष्क बमकांड में भूमिका के लिए भी उसे अतिरिक्त पांच साल की सजा हुई।
वर्ष 2003 में कनिष्क मामले के दो अभियुक्तों रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी की शिनाख्त रैयत द्वारा की जानी थी लेकिन ऐन मौके पर वह मुकर गया। बताया गया कि रैयत ने 27 बार झूठ बोला और इस वजह मलिक व बागड़ी रिहा हो गए।
इस बार दोषी करार दिए जाने पर उसे 14 साल की सजा होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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